Mandya violence Ganesh Visarjan: कर्नाटक के मांड्या जिले में गणेश विसर्जन के दौरान सांप्रदायिक तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। शोभायात्रा के दौरान एक मस्जिद की ओर से कथित पथराव किए जाने के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके जवाब में शोभायात्रा में शामिल युवकों ने भी मस्जिद पर पत्थर बरसाए, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया।

हिंसा के चलते कम से कम 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पूरे मांड्या में धारा 144 लागू कर दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

तनावपूर्ण रहा मांड्या का सोमवार
घटना के बाद सोमवार सुबह से ही मांड्या में तनाव का माहौल रहा। सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी है। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस ने पथराव में घायल लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की गहन जांच जारी है।
दोहराई गई पिछले साल की घटना
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी मांड्या के नागमंगला इलाके में गणेश विसर्जन के दौरान दो गुटों में झड़प और आगजनी हुई थी। कई दुकानों और वाहनों को आग लगा दी गई थी, जिसके चलते प्रशासन को धारा 144 लागू करनी पड़ी थी। उस घटना में भी 50 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई थीं।
देश के अन्य हिस्सों में भी सांप्रदायिक घटनाएं
गणेश विसर्जन के दौरान सांप्रदायिक तनाव केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा। 5 सितंबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के सेसई सड़क गांव में यावद और रावत समुदायों के बीच झड़प हो गई। उसी दिन उज्जैन में मोटी मस्जिद के पास विसर्जन के दौरान हिंसा हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। गुजरात के वड़ोदरा में 26 अगस्त को शोभायात्रा पर अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई, जिसे विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू त्योहारों का अपमान बताया। 27 अगस्त को दिल्ली के मंडावली में एक गणपति पंडाल में हत्या की घटना से सनसनी फैल गई।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
हिंदू संगठनों ने मांड्या की घटना की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष ऐसे धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन हिंसा के बावजूद हालात बिगड़ना चिंता का विषय है।
गणेश विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों में बार-बार सांप्रदायिक तनाव का उभरना देश की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बनता जा रहा है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसी घटनाओं पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई करे और दोनों समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बहाली के प्रयास तेज करे।
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