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Karur Stampede: अस्पताल पहुंचे NDA प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, निष्पक्ष जांच की मांग तेज़

Karur Stampede: 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर ज़िले में हुई भीषण भगदड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। अब इस दर्दनाक घटना पर राजनीति भी तेज़ हो गई है। NDA गठबंधन के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को करूर पहुंचा और घायल लोगों से मुलाकात की। साथ ही, उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की।

भाजपा नेता और सांसद अनुराग ठाकुर ने अस्पताल में घायलों से मिलने के बाद कहा,“NDA सांसदों का यह प्रतिनिधिमंडल उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद हम ज़िला अधिकारियों से मिलेंगे और उनसे पूछने के लिए प्रश्नों की एक सूची तैयार की है… सच तो यह है कि आम आदमी ने अपनी जान गंवाई है, और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है – यह पता लगना चाहिए।”

भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने इस घटना को “राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी और भयानक भगदड़” बताया। उन्होंने कहा:“प्रशासन को इसका ध्यान रखना चाहिए था, लेकिन वे इसमें विफल रहे। लोगों की भीड़ और अव्यवस्था देखकर बहुत दुख हुआ। मैंने उस जगह जाकर देखा जहाँ भगदड़ हुई थी। ऐसा नहीं होना चाहिए था।”उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम आयोजक और बीजेपी से अलग हो चुके विजय पर भी सवाल उठाते हुए कहा,“अगर विजय इतने लोकप्रिय हैं, तो उन्हें इसका पूर्वानुमान लगाना चाहिए था और उतने ही लोगों को आमंत्रित करना चाहिए जितने को सम्हालना संभव हो।”

क्या है करूर भगदड़ मामला?

27 सितंबर को करूर में एक निजी आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई। प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, आयोजन स्थल पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के उचित इंतज़ाम नहीं किए गए थे। इसमें कई लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बुज़ुर्ग भी शामिल थे।

निष्पक्ष जांच की मांग

NDA नेताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सज़ा मिल सके। प्रतिनिधिमंडल ने ज़िला प्रशासन से मुलाकात कर घटना की रिपोर्ट मांगी और कहा कि इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जाएगा।

करूर भगदड़ न सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी का भी सवाल उठाती है। जनता की जान की कीमत पर होने वाले ऐसे आयोजन निंदनीय हैं। अब ज़रूरत है निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की।

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