Kashmir Drug Trafficking
Kashmir Drug Trafficking: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का चेहरा बदल रहा है। सीमा पार बैठी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने अब घाटी की शांति भंग करने के लिए ‘नार्को-टेरर’ (Narco-Terror) का सहारा लिया है, जिसमें महिलाओं का इस्तेमाल एक ढाल के रूप में किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, दिखने में मासूम लेकिन खतरनाक इरादों वाली ये महिलाएं न केवल नशीले पदार्थों की तस्करी कर रही हैं, बल्कि हथियारों की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। आईएसआई का मानना है कि महिलाओं पर सुरक्षाबलों को कम संदेह होता है, जिसका फायदा उठाकर वे नशों का जाल बिछा रहे हैं।
हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई ऐसे मामलों का पर्दाफाश किया है जहाँ महिलाएं पूरे तस्करी गिरोह का नेतृत्व कर रही थीं। श्रीनगर में पुलिस ने तमन्ना अशरफ नामक युवती को गिरफ्तार किया, जो कूरियर के जरिए देश के विभिन्न शहरों में ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क चला रही थी। वहीं, नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे कुपवाड़ा में बांडीपोरा की मुनीबा बेगम को भारी मात्रा में हेरोइन के साथ दबोचा गया। यह हेरोइन गुलाम कश्मीर (PoK) से तस्करी कर लाई गई थी। अक्टूबर 2025 में शोपियां और हाल ही में जम्मू, सांबा तथा कठुआ जिलों में भी कई महिला तस्कर पकड़ी गई हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।
वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत लगभग 1,100 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 1,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अकेले जम्मू जिले में दर्ज 204 एफआईआर (FIR) में पकड़े गए 311 आरोपियों में से 35 महिलाएं थीं। एंटी नारकोटिक्स फोर्स और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पिछले दो वर्षों में महिलाओं की भागीदारी में तेजी आई है। कई महिलाएं सीधे सीमा पार बैठे आतंकी हैंडलरों के संपर्क में हैं और वे एक पिरामिड की तरह अन्य महिलाओं को इस काले कारोबार से जोड़कर बड़ा नेटवर्क तैयार कर रही हैं।
आतंकी हैंडलरों और तस्करों के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए भारतीय सुरक्षाबल भी पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। सांबा और कठुआ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर पुलिस, बीएसएफ (BSF) और सीआरपीएफ (CRPF) ने अपनी महिला विंग को सक्रिय कर दिया है। चेक-पोस्ट और तलाशी अभियानों के दौरान अब महिला कर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है ताकि तस्करी में शामिल महिलाओं की गहन जांच की जा सके। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चाहे आईएसआई कितनी भी नई चालें चल ले, सुरक्षा एजेंसियां हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।
रक्षा मामलों के जानकार और पूर्व आईजीपी (IGP) अशकूर वानी ने इस घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया है। उनका कहना है कि नार्को-टेरर में महिलाओं का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे युवाओं को आसानी से प्रभावित कर उन्हें नशे के दलदल में धकेल सकती हैं। नशे की लत के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाना आईएसआई की पुरानी रणनीति रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस षड्यंत्र को केवल पुलिस की सख्ती से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और कड़े खुफिया तंत्र के जरिए ही जड़ से खत्म किया जा सकता है।
नार्को-टेरर न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी के भविष्य को भी बर्बाद कर रहा है। आईएसआई की यह नई ‘महिला कार्ड’ वाली चाल सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर है। लगातार हो रही गिरफ्तारियां और बरामदगी यह साबित करती हैं कि सुरक्षाबल इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों में तकनीकी निगरानी और बढ़ाई जाएगी ताकि नशा और आतंकवाद के इस अपवित्र गठबंधन को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।
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