Liquor Scam Case : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खिलाफ शराब घोटाले से जुड़ी एक याचिका दायर की। इस याचिका में दोनों नेताओं ने ईडी द्वारा दर्ज किए गए मामले को रद्द करने की मांग की। अदालत ने कुछ दलीलें सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई 12 नवंबर तक टाल दी।

केजरीवाल और सिसोदिया की दलीलें: ईडी के खिलाफ केस रद्द हो
दिल्ली हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दलील दी कि इस मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं ली गई थी। उनका कहना था कि यदि मुकदमा चलाने के लिए सही मंजूरी नहीं ली गई तो ईडी का केस अवैध है। इस पर ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दावा किया कि मंजूरी ली गई थी और इसे ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने इस दलील का खंडन किया और कहा कि इस मामले में कोई मंजूरी अदालत के समक्ष पेश नहीं की गई थी।

ईडी का जवाब और कोर्ट की टिप्पणियां
ईडी ने जवाब दाखिल करते हुए दावा किया कि उनके पास मंजूरी थी और इसे ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया था। वहीं, केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा कि ईडी ने पहले कहा था कि सीबीआई की मंजूरी में ही ईडी की कार्रवाई भी शामिल है, लेकिन अब दो साल बाद उन्होंने नई मंजूरी के दस्तावेज पेश किए। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईडी ने दिल्ली के उपराज्यपाल से मंजूरी ली थी और इसे रिकॉर्ड पर रखा।
ट्रायल कोर्ट का आदेश और हाईकोर्ट में अपील
ईडी ने जुलाई 2023 में केजरीवाल के खिलाफ सातवीं चार्जशीट दायर की थी, और ट्रायल कोर्ट ने 9 जुलाई को इसे संज्ञान में लिया। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इसके बाद केजरीवाल ने नवंबर में दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि वह पब्लिक सर्वेंट थे और इस मामले में केस चलाने के लिए ईडी के पास आवश्यक मंजूरी नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और हाईकोर्ट की सुनवाई
हाईकोर्ट में केजरीवाल की याचिका खारिज होने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया और कहा कि पब्लिक सर्वेंट पर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धाराओं के तहत केस चलाने के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ईडी को राज्यपाल से अनुमति लेने के लिए कहा गया। इसके बाद 6 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि यदि पब्लिक सर्वेंट पर केस चलाना हो, तो सरकार की अनुमति जरूरी होगी, और यह नियम सीबीआई और राज्य पुलिस पर भी लागू होगा।
दिल्ली शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय का केस अब एक बड़ी कानूनी लड़ाई बन चुका है। जबकि हाईकोर्ट में सुनवाई का निर्णय 12 नवंबर तक के लिए टल चुका है, यह मामला भारतीय राजनीति और कानून के लिए एक अहम मोड़ पर खड़ा है। इस केस में सरकार की अनुमति की आवश्यकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण दिशा का संकेत है। अब यह देखना होगा कि आगे की सुनवाई में इस मुद्दे पर क्या नया विकास होता है।










