UP Rajya Sabha Election : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए कार्यक्रम जारी कर दिया है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और मतदान 16 अक्टूबर को होना है। चुनावी कार्यक्रम सामने आने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।
केशव मौर्य ने सपा विधायकों को लेकर किया दावा
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि सपा के करीब 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि, विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने संबंधी इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
‘सरप्राइज’ वाले बयान पर मौर्य का पलटवार
केशव प्रसाद मौर्य ने सपा की ओर से राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को चौंकाने संबंधी दावे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए और बीजेपी की ओर से उन्हें ऐसा सरप्राइज मिल सकता है, जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की होगी। उनके बयान के बाद राज्यसभा चुनाव के संभावित समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
INDIA गठबंधन पर भी साधा निशाना
डिप्टी सीएम ने विपक्षी INDIA गठबंधन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने गठबंधन को ‘भानुमति का कुनबा’ बताते हुए कहा कि इसमें आपसी एकता नहीं बची है। मौर्य इससे पहले भी सपा और विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर में उन्होंने अखिलेश यादव के PDA अभियान पर भी निशाना साधा था।
चुनाव आयोग और EVM को लेकर भी बयानबाजी
केशव मौर्य ने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी हार के लिए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है, जबकि जीत मिलने पर उसे अपनी उपलब्धि बताता है। यह टिप्पणी राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आई है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर लगाए आरोप
वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार बीजेपी सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने सरकार पर पक्षपात और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग का मुद्दा प्रमुख रहा है। हालिया राजनीतिक गतिविधियों में भी सपा इसी सामाजिक समूहों को केंद्र में रखकर अपना अभियान आगे बढ़ा रही है।
राज्यसभा चुनाव में आंकड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव विधानसभा में दलों की संख्या और विधायकों के समर्थन पर निर्भर करेगा। ऐसे में राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं। सपा ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के नाम भी सामने रखे हैं, जबकि बीजेपी की ओर से उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी रहने की रिपोर्ट है।
दसवीं सीट को लेकर बन सकता है मुकाबला
मीडिया रिपोर्टों में विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर शुरुआती चुनावी समीकरणों पर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक कई सीटों पर मुकाबला अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देता है, जबकि अतिरिक्त सीट को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति उम्मीदवारों, प्रथम वरीयता वाले मतों और उपलब्ध समर्थन के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
नामांकन के बाद साफ होंगे राजनीतिक समीकरण
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल बीजेपी और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ बीजेपी नेता विपक्षी खेमे में संभावित टूट और समर्थन के दावे कर रहे हैं, वहीं सपा सरकार की नीतियों और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रख रही है। अब सभी की नजर नामांकन, समर्थन जुटाने और 16 अक्टूबर के मतदान पर है।
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