07 मई को सरगुजा लोकसभा सीट के लिए मतदान हो गया है। भारी मतदान ने जहां दोनों ही राजनीतिक दल व प्रत्याशियों को बेचैन कर दिया है वहीं दोनों दल दावे-प्रति दावे कर रहे हैं। अपनी-अपनी योजनाओं का असर बता रहे हैं किंतु मतदान के बाद अब गांव-गांव से जो रिपोर्ट आ रही है वह बेचैन कर देने वाली है। 20 साल से जिस पार्टी के सांसद यहां से चुने जाते थे उनके लिए खबर कुछ अच्छी नहीं आ रही। हालांकि चार जून को सब कुछ साफ हो जाएगा पर जो खबरें आ रहीं हैं उससे तनाव बढ़ना लाजिमी है। अब तो चर्चाओं में ही समय कट रहा है। सूचनाओं में ही सुख और दुख मिल रहा है। बस इंतजार है मतगणना की तारीख का, जिस दिन सब कुछ साफ हो जाएगा। इस दिन धोती वाले का नंबर लगेगा या फिर सलवार सूट भारी पड़ेगा, देखना होगा।
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छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस बाबा इन दोनों फिर चर्चा में हैं। मतदान से ठीक एक दिन पूर्व यहां पहुंचे और मीडिया ने उन्हें घेर लिया। तब से वह सरगुजा में हैं और लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। एक शादी समारोह में पहुंचे बाबा से किसी ने कहा “बाबा बहुत कड़ा बयान दे रहे हैं आप आजकल”, मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, आप लोग हरवा दिए हैं, अब क्या करें, अब तो बयान बाजी ही बचा है, कोई काम नहीं है, कोई जिम्मेदारी नहीं है।
ऐसे में बयानबाजी तो कर सकते हैं न..!
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सरगुजिहा आदमी हर किसी का नामकरण करने में माहिर होता है। शक्ल, सूरत और हुलिया के अनुसार नाम धर (नामकरण) देता है। सरगुजिहा बोलचाल में हर किसी का एक न एक अलग नाम होता है। यह नाम पीठ पीछे लिया जाता है, क्योंकि सामने यह नाम पुकार दिए जाने से कई तरह के खतरे भी उत्पन्न हो जाते हैं पर यह नाम काफी प्रसिद्ध और प्रचलित हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में तो ऐसे नामों की खूब मांग रहती है..! जैसे… कीचड़ में गिर गया उसका नाम “चिखला”। पतला दुबला कोई शख्स है तो उसका नाम “हड्डी”, “डंगरा’, “मरहा”, कोई मोटा है तो “मोटका”, ढडुहा”, “गलफुलवा” “बरहामुंहा”, “सूअरमुंहा”…! ऐसे तमाम तरह के नाम रख दिए जाते हैं, जो चर्चित भी हो जाते हैं।
यहां शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसका अतिरिक्त नामकरण न किया जाता होगा..! क्या आप जानते हैं…! शहर के एक साहित्यकार ने हाल ही में दो लोगों का नया नामकरण किया है..!
एक का “झोंटा महाराज” दूसरे का “पाव रोटी”..! अब आप समझिए और जानिए यह “झोंटा महाराज” और “पाव रोटी” कौन हैं.?
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इन दिनों भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के साथ शहर के नागरिकों में भी इस बात की चर्चा है कि भाजपा में तो दो पंडित सब पर भारी हैं…! ये दोनों पंडितों की जोड़ी ने भाजपा संगठन को भी बेचैन किया हुआ है..!
ये दोनों पंडित कहां जाते हैं, क्या करते हैं, किसके साथ रहते हैं, किस अधिकारी के साथ बैठे थे..! आज क्या शिकवा-शिकायत किए, किस बड़े नेता के साथ नजर आए इसकी चर्चा जरूर होती है। भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारी तो इनसे मिलने पर दुआ-सलाम जरूर करते हैं पर इनकी सक्रियता से परेशान रहते हैं..!
भाजपा के नेता इन दोनों पंडितों से इतने परेशान रहते हैं कि पार्टी के आयोजनों की सूची से इनका नाम भी गायब कर देते हैं, ताकि यह मंच या सभा में नजर ही न आएं, पर इन दोनों का जुगाड़ ऐसा है कि इन्हें कोई रोक नहीं पाता, टोंक नहीं पाता..! कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि इन्हें भाजपा का तौर तरीका नहीं पता पर अब के दौर की भाजपा में ये दोनों पंडित बिल्कुल फिट बैठ रहे हैं..!
हम इन दोनों पंडितों का नाम यहां नहीं लिख रहे क्योंकि दोनों पंडितों को कम से कम भाजपा के लोग तो बखूबी जानते हैं..!
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