Gaza Ceasefire : अमेरिकी वार्ताकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर ने रविवार को हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या से एक अहम और दुर्लभ मुलाकात की। यह बैठक गाजा में लंबे समय से अटके युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका की नई कूटनीतिक कोशिशों का हिस्सा बताई जा रही है। कुश्नर सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात करेंगे। दोनों बैठकों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका समर्थित 15-सूत्रीय रोडमैप को लागू कराने का रास्ता तलाशना है।
15-सूत्रीय रोडमैप पर टिकी उम्मीदें
अमेरिका समर्थित प्रस्ताव के तहत हमास को गाजा में हथियार छोड़ने और निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया स्वीकार करनी होगी। इसके बदले इजराइली सेना को युद्ध से तबाह हुए गाजा क्षेत्र से पीछे हटना है। इस योजना को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। खासतौर पर हमास के निरस्त्रीकरण का मुद्दा अब तक वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
गाजा के 20 लाख लोगों का भविष्य दांव पर
गाजा में प्रमुख सैन्य अभियानों के खत्म हुए 10 महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वहां स्थायी शांति और पुनर्निर्माण का रास्ता अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। करीब 20 लाख लोगों की जिंदगी और युद्ध से तबाह हुए पूरे इलाके का भविष्य इस कूटनीतिक प्रयास से जुड़ा है। वर्तमान में गाजा के बड़े हिस्से पर इजराइली सेना का नियंत्रण बताया जा रहा है, जिससे मानवीय और राजनीतिक परिस्थितियां बेहद जटिल बनी हुई हैं।
मिस्र में हुई बैठक से पहले भी बनी थी राह
पिछले साल मिस्र में जेरेड कुश्नर, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और हमास नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। इस बैठक ने युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, इसके बाद हमास के निरस्त्रीकरण को लेकर सहमति नहीं बन सकी और वार्ता एक महत्वपूर्ण बिंदु पर अटक गई। मौजूदा बैठक को इसी गतिरोध को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
मिस्र में कई देशों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
क्षेत्रीय अधिकारियों और हमास के एक अधिकारी ने कुश्नर और खलील अल-हय्या की मुलाकात की पुष्टि की है। अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी। बैठक में मिस्र, कतर और तुर्की जैसे मध्यस्थ देशों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। इन देशों की भूमिका इजराइल और हमास के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही है।
नेतन्याहू ने योजना पर जताई असहमति
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन की 15-सूत्रीय योजना पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी। वह अमेरिका के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर उनका रुख अलग दिखाई दिया। अब कुश्नर के साथ ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और अमेरिकी समर्थित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के निदेशक निकोले म्लादेनोव की नेतन्याहू से मुलाकात प्रस्तावित है।
अरब देशों ने इजराइल के फैसले पर जताई नाराजगी
नेतन्याहू के साथ बैठक से पहले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों ने रोडमैप को खारिज करने के इजराइली फैसले की आलोचना की। जॉर्डन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और युद्धविराम में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देशों ने भी बयान पर हस्ताक्षर किए। इन देशों ने कहा कि गाजा में शांति की कोशिशों में बाधा डालने की जिम्मेदारी अब इजराइल पर है।
हमास ने निरस्त्रीकरण पर रखी अपनी शर्त
हमास के एक अधिकारी के मुताबिक, संगठन रोडमैप के तहत निरस्त्रीकरण पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, समूह मध्यस्थ देशों की ओर से प्रस्तावित 14 दिन की वार्ता अवधि शुरू होने का इंतजार कर रहा है। हमास का कहना है कि बातचीत शुरू करने के लिए सभी पक्षों को रोडमैप स्वीकार करना होगा।
इजराइली सेना की वापसी की मांग
हमास ने यह भी मांग रखी है कि रोडमैप लागू करने से पहले इजराइल गाजा में हमले बंद करे और तथाकथित ‘येलो लाइन’ तक अपनी सेना पीछे हटाए। इस सीमा को पहले स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था। हमास का दावा है कि इजराइली सेना इस रेखा से आगे बढ़ चुकी है और अब गाजा के करीब 60 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण है। ऐसे में कुश्नर की बातचीत युद्धविराम की दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है।
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