लद्दाख के वकीलों को अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए दिल्ली आने से राहत मिल सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने नई हाई कोर्ट बेंच के उद्घाटन पर बड़ी घोषणा की है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, कम खर्च और आसान न्याय का रास्ता कैसे खुलेगा? जानिए पूरी खबर।
लद्दाख के वकीलों को अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए दिल्ली आने से राहत मिल सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने नई हाई कोर्ट बेंच के उद्घाटन पर बड़ी घोषणा की है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, कम खर्च और आसान न्याय का रास्ता कैसे खुलेगा? जानिए पूरी खबर।

Ladakh High Court Bench : लद्दाख के वकीलों और मुकदमों से जुड़े पक्षकारों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपने मामलों की सुनवाई के लिए हर बार दिल्ली आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की बेंच के उद्घाटन समारोह में यह महत्वपूर्ण घोषणा की।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि लद्दाख बेंच के वकीलों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख से संबंधित मामलों को एक ही दिन सूचीबद्ध किया जाएगा। इन मामलों की सुनवाई भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। इससे वकीलों और पक्षकारों का यात्रा पर लगने वाला समय, पैसा और मेहनत बचेगी।

लेह के मेलांगथोंग स्थित हाई कोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि लद्दाख में लगभग 3,500 मीटर की ऊंचाई पर हाई कोर्ट की बेंच स्थापित हो रही है। हालांकि, उनके अनुसार अदालत की वास्तविक सफलता उसकी ऊंचाई से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह आम लोगों के कितने करीब है।उन्होंने कहा कि नई बेंच का लाभ केवल लेह तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कारगिल और क्षेत्र के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी न्याय व्यवस्था तक आसानी से पहुंच मिलनी चाहिए।
सीजेआई ने लद्दाख के लोगों की न्याय पाने में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक यहां के लोगों को हाई कोर्ट पहुंचने के लिए ग्रेट हिमालय के दूसरी ओर जाना पड़ता था। सर्दियों में यात्रा की मुश्किलें और बढ़ जाती थीं तथा कई बार हवाई यात्रा ही विकल्प बचती थी।पेंशन के लिए संघर्ष कर रही विधवा, अपने बच्चे से मिलने की कानूनी कोशिश कर रही मां या बीमा राशि के लिए अदालत पहुंचने वाले बुजुर्ग के लिए यह सफर बेहद महंगा साबित हो सकता था। इससे कई लोगों के लिए न्याय पाने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाता था।
सीजेआई ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल दूरदराज के क्षेत्रों में न्याय व्यवस्था को सुलभ बनाने के लिए किया जाना चाहिए। कारगिल से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दाखिल याचिका कुछ ही मिनटों में लेह की बेंच तक पहुंच सकती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई और संदेशों के जरिए अगली तारीख की सूचना देना भी संभव है।उन्होंने जोर दिया कि तकनीक लोगों के लिए सुविधा बने, नई बाधा नहीं। जिन नागरिकों को कंप्यूटर चलाना नहीं आता, उनकी मदद के लिए ई-सेवा केंद्र जैसे सहायता केंद्र स्थापित करना भी जरूरी है।

सीजेआई ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को आर्थिक कठिनाइयों के कारण न्याय से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। कानूनी सहायता कोई दान नहीं, बल्कि संविधान का वादा है। इसके लिए गांवों में जागरूकता शिविर, पैरा-लीगल वॉलंटियर, मुफ्त वकील और लोक अदालत जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
अपने संबोधन में सीजेआई ने उम्मीद जताई कि लद्दाख की कोई बच्ची भविष्य में इसी अदालत में मुकदमा लड़ेगी और आगे चलकर न्यायाधीश भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि बेंच की असली सफलता तभी होगी, जब यह स्थानीय लोगों के जीवन का हिस्सा बने और न्याय को उनके दरवाजे तक पहुंचाए।

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