Lal Krishna Advani Birthday : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और भारत रत्न से सम्मानित लालकृष्ण आडवाणी आज 8 नवंबर 2026 को अपना 99वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास अवसर पर देशभर के राजनीतिक नेताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें बधाइयां दी जा रही हैं। आडवाणी को भाजपा का भीष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पार्टी को मजबूत बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में शामिल भाजपा की विकास यात्रा में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सिंध से शुरू हुआ सफर, देश विभाजन के बाद चुनी राष्ट्रसेवा की राह
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में हुआ था। भारत विभाजन के समय उन्हें अपना घर छोड़कर भारत आना पड़ा। आजादी के समय वह देश के स्वतंत्रता दिवस का जश्न भी नहीं मना सके थे, क्योंकि विभाजन की परिस्थितियों के कारण उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा था। महज 14 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर उन्होंने राष्ट्रसेवा का रास्ता चुना। बाद में उन्होंने भारतीय जनसंघ के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और अपना पूरा जीवन संगठन तथा देश की राजनीति को समर्पित कर दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर बने जनसंघ के अध्यक्ष
आडवाणी के राजनीतिक जीवन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वाजपेयी ने उन्हें भारतीय जनसंघ की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रेरित किया था। शुरुआत में आडवाणी अध्यक्ष बनने से हिचकिचा रहे थे। उन्हें लगता था कि वह अच्छे वक्ता नहीं हैं और सार्वजनिक सभाओं में बोलने में असहज महसूस करते हैं। हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी के समझाने के बाद दिसंबर 1972 में वह भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने। यहीं से उनके संगठनात्मक नेतृत्व का एक नया अध्याय शुरू हुआ।

1990 की राम रथयात्रा ने बनाया देश का बड़ा जननेता
आडवाणी के राजनीतिक सफर में 1990 की राम रथयात्रा को ऐतिहासिक मोड़ माना जाता है। इस यात्रा ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली जननेता के रूप में स्थापित किया। इसके बाद भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ने लगा। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को केवल दो सीटें मिली थीं, लेकिन 1989 के चुनाव में भाजपा ने 86 सीटों तक पहुंचकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। इसके बाद 1992 में 121 और 1996 में 161 सीटों के साथ पार्टी देश की प्रमुख राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी।
गृह मंत्री से उप प्रधानमंत्री तक संभाली अहम जिम्मेदारी
लालकृष्ण आडवाणी केवल पार्टी के संगठनकर्ता ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। लगभग तीन दशक तक संसद में सक्रिय रहने के बाद वह देश के गृह मंत्री बने। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 1999 से 2004 तक उप प्रधानमंत्री का पद संभाला। आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राजनीतिक सोच रही। संसद में उनके भाषण तथ्यों और तार्किक विचारों के लिए पहचाने जाते थे।

2009 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने थे आडवाणी
भाजपा ने 10 दिसंबर 2007 को औपचारिक रूप से लालकृष्ण आडवाणी को 2009 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। उस समय वह विपक्ष के सबसे प्रमुख नेताओं में शामिल थे। हालांकि, 2009 के आम चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को जीत मिली और मनमोहन सिंह दोबारा प्रधानमंत्री बने। इसके बाद आडवाणी ने सुषमा स्वराज को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। भाजपा के गठन के बाद वह सबसे लंबे समय तक पार्टी अध्यक्ष रहने वाले नेताओं में भी शामिल रहे।
पद्म विभूषण से भारत रत्न तक मिला राष्ट्रीय सम्मान
आडवाणी की छह दशक से अधिक लंबी राजनीतिक यात्रा भारतीय लोकतंत्र और भाजपा के विकास को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। संगठन निर्माण, वैचारिक स्पष्टता और संसदीय राजनीति में उनके योगदान को देश ने सम्मान दिया। वर्ष 2015 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2024 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। आज 99वें जन्मदिन पर उनका राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बना हुआ है।
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