Lalan Singh in Lok Sabha
Lalan Singh in Lok Sabha: लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने प्रखरता से अपनी बात रखी। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत बिहार के राजनीतिक इतिहास से की। सिंह ने सदन को याद दिलाया कि 2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता संभाली, तो उसके ठीक एक साल बाद 2006 में उन्होंने पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का क्रांतिकारी फैसला लिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण की यह नींव बिहार में बहुत पहले ही रखी जा चुकी थी।
चर्चा के दौरान ललन सिंह ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि 2006 में जब बिहार में महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा था, तब लालू यादव ने इसका कड़ा विरोध किया था। सिंह के अनुसार, इस विरोध का नकारात्मक राजनीतिक परिणाम उनके दल को लंबे समय तक भुगतना पड़ा। इसी क्रम में उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति का संदर्भ देते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को भी आगाह किया। उन्होंने सलाह दी कि महिलाओं की भागीदारी से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर उन्हें सावधान रहना चाहिए, अन्यथा जनता उन्हें नकार सकती है।
ललन सिंह ने केंद्र सरकार के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण से संबंधित ये तीनों विधेयक इसी सोच का हिस्सा हैं। देश की 50 प्रतिशत महिला आबादी को कानून बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना ही इस सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए सरकार ने 2023 में ही अपनी मंशा साफ कर दी थी, और अब ये विधेयक उसे धरातल पर उतारने का माध्यम हैं।
परिसीमन विधेयक 2026 पर बोलते हुए ललन सिंह ने इसके तकनीकी और रणनीतिक महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर विधानसभा और लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है। यदि राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ती है, तो स्वाभाविक रूप से लोकसभा की सीटों में भी इजाफा होगा। इसी बढ़ोत्तरी के साथ महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना संभव हो पाएगा। उन्होंने इस प्रक्रिया पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को अनावश्यक और आधारहीन करार दिया।
ललन सिंह ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार ने इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, तब कांग्रेस नेतृत्व उसमें शामिल नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जो दल सामाजिक परिवर्तन की बात करते हैं, वे ऐसे ऐतिहासिक विधेयकों के समय पीछे क्यों हट रहे हैं? सिंह ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया उनकी महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
अंत में, ललन सिंह ने उन तर्कों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि ये विधेयक जल्दबाजी में लाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2023 से पिछले तीन वर्षों से इसकी व्यापक तैयारी चल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलता है, तो इससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने दावा किया कि देश की महिलाएं इस पहल का स्वागत करेंगी और जो भी दल इसका विरोध करेगा, उसे आगामी चुनावों में भारी राजनीतिक क्षति उठानी पड़ेगी।
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