Delimitation Debate
Delimitation Debate: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण (संविधान 131वां संशोधन) और परिसीमन विधेयक 2026 पर तीखी बहस जारी है। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने सरकार की मंशा और बिल के तकनीकी पहलुओं पर कड़े प्रहार किए। थरूर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना महिलाओं की आकांक्षाओं को अधर में लटकाने जैसा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सोचे-समझे किया गया परिसीमन “राजनीतिक नोटबंदी” साबित हो सकता है।
शशि थरूर ने अपने संबोधन में सबसे प्रमुख बिंदु दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के बीच पैदा होने वाले संभावित असंतुलन को बनाया। उन्होंने तर्क दिया कि परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें बढ़कर 850 होने की संभावना है, लेकिन राज्यसभा की सीटों में वृद्धि को लेकर विधेयक पूरी तरह मौन है। थरूर के अनुसार, यदि केवल निचले सदन का विस्तार होता है और उच्च सदन की स्थिति यथावत रहती है, तो इससे संसदीय प्रणाली का ढांचागत संतुलन बिगड़ जाएगा। वर्तमान में लोकसभा की 543 और राज्यसभा की 250 सीटों के बीच जो अनुपात है, वह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
लोकसभा के आकार को बढ़ाने की आलोचना करते हुए थरूर ने कहा कि 850 सांसदों वाली संस्था अपनी कार्यक्षमता खो सकती है। उन्होंने आसन (स्पीकर) की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले से ही संसद के कार्यदिवस कम होते जा रहे हैं, ऐसे में इतने अधिक सदस्यों को बोलने का पर्याप्त अवसर देना और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करना लगभग असंभव हो जाएगा। थरूर ने आशंका जताई कि संख्या बल बढ़ने से चर्चा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और सदन महज एक भीड़ बनकर रह जाएगा।
थरूर ने परिसीमन के संघीय ढांचे पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच सीटों का असंतुलन बढ़ेगा। तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य, जिन्होंने सफलतापूर्वक जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को लागू किया है, उन्हें अपनी कम जनसंख्या के कारण सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। थरूर ने मांग की कि परिसीमन जैसे गंभीर विषय पर जल्दबाजी करने के बजाय छोटे और बड़े राज्यों के हितों के बीच संतुलन बिठाने के लिए गहन मंथन की आवश्यकता है।
सरकार की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस सांसद ने परिसीमन की तुलना 2016 की नोटबंदी से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिना तैयारी के लिए गए नोटबंदी के फैसले से देश को आर्थिक नुकसान हुआ, उसी तरह हड़बड़ी में लाया गया परिसीमन “राजनीतिक नोटबंदी” बन जाएगा। थरूर ने सरकार से आग्रह किया कि महिलाओं के हक को “इतिहास की सबसे जटिल और विवादास्पद प्रशासनिक कवायद” (परिसीमन) के साथ जोड़कर उन्हें बंधक न बनाया जाए।
अंत में, शशि थरूर ने इन महत्वपूर्ण विधेयकों को और अधिक स्पष्टता और पारदर्शिता के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का हम स्वागत करते हैं, लेकिन इसके कार्यान्वयन को जनगणना और परिसीमन की अनिश्चित शर्तों पर छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को विपक्षी दलों के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए ताकि देश के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।
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