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Supreme Court on Pawan Khera: “दस्तावेजों में हेरफेर बर्दाश्त नहीं”, पवन खेड़ा की जमानत अर्जी खारिज, SC की कड़ी फटकार!

Supreme Court on Pawan Khera:  कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को उच्चतम न्यायालय से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने उनकी ट्रांजिट जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। जस्टिस माहेश्वरी की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि खेड़ा को राहत के लिए असम की संबंधित अदालत में ही याचिका दायर करनी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि खेड़ा आज दोपहर के बाद ही गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके द्वारा दिए गए पिछले आदेश या टिप्पणियां असम की अदालत में होने वाली सुनवाई की योग्यता (Merits) को प्रभावित नहीं करेंगी।

फर्जी दस्तावेजों पर शीर्ष अदालत की गंभीर नाराजगी

सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा के पक्ष द्वारा हाईकोर्ट में कथित तौर पर गलत और जाली दस्तावेज पेश करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने इसे ‘छोटी गलती’ मानने से इनकार करते हुए कहा कि न्याय प्रक्रिया में दस्तावेजों की जालसाजी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि, राहत देते हुए न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि फर्जी दस्तावेजों को लेकर शीर्ष अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों का असर गुवाहाटी हाईकोर्ट में होने वाली अग्रिम जमानत की सुनवाई पर नहीं पड़ेगा और वहां की अदालत स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेगी।

वरिष्ठ वकील सिंघवी की दलीलें और अनुच्छेद 21 का हवाला

पवन खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि खेड़ा को मिली अंतरिम सुरक्षा समाप्त हो रही है और इस देश में अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है। सिंघवी ने कोर्ट से गुजारिश की कि खेड़ा की सुरक्षा को मंगलवार तक बढ़ा दिया जाए ताकि वे सुचारू रूप से असम में याचिका दाखिल कर सकें। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पुलिस की भारी तैनाती और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के कारण उनके मुवक्किल को सुरक्षा की आवश्यकता है।

दस्तावेजों की त्रुटि पर स्पष्टीकरण और माफी की मांग

सिंघवी ने स्वीकार किया कि याचिका में कुछ तकनीकी खामियां थीं, जिन्हें बाद में सुधार लिया गया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि हैदराबाद में संपत्ति होने और उनकी पत्नी के तेलंगाना में चुनाव लड़ने से संबंधित हलफनामे को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई थी। सिंघवी ने कहा कि जालसाजी के लिए ‘आपराधिक इरादे’ की जरूरत होती है, जो यहाँ मौजूद नहीं था। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी मांगते हुए सुरक्षा की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए अनसुना कर दिया कि राहत के लिए उचित मंच हाईकोर्ट ही है।

निजामुद्दीन में पुलिस की तैनाती और मुख्यमंत्री का संदर्भ

बहस के दौरान सिंघवी ने राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल इसलिए कि मुख्यमंत्री को कोई बयान पसंद नहीं आया, किसी के घर पर सौ पुलिसकर्मी भेजना उचित नहीं है। उन्होंने निजामुद्दीन में पुलिस की गतिविधियों का जिक्र करते हुए खेड़ा की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध किया और याचिका को खारिज करने का समर्थन किया।

खेड़ा के पास अब केवल असम हाईकोर्ट का विकल्प

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पवन खेड़ा के पास अब तत्काल गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें आज ही अपनी अर्जी दाखिल करनी होगी। दो दिनों के भीतर यह दूसरा अवसर है जब खेड़ा को राहत नहीं मिली है। अब सबकी नजरें असम की अदालत पर टिकी हैं, जहां खेड़ा को अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वहां की अदालत मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला लेगी।

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