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Manipur News: मणिपुर में लोकतंत्र की वापसी,  युमनाम खेमचंद ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर संभाली कमान

Manipur News: मणिपुर के राजनीतिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) के बाद राज्य से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया है। गौरतलब है कि राज्य में पिछले करीब एक साल से राष्ट्रपति शासन लागू था, जिसे अब शांति और स्थिरता की बहाली के बाद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम के साथ ही राज्य में ठप पड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पुनः गति मिली है और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के हाथों में शासन की कमान सौंप दी गई है।

युमनाम खेमचंद सिंह ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ: राजभवन में भव्य समारोह

राष्ट्रपति शासन हटने के कुछ ही घंटों बाद, मणिपुर को अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इंफाल स्थित राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर बीजेपी के केंद्रीय पर्यवेक्षक, नवनिर्वाचित विधायक और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। खेमचंद सिंह के शपथ ग्रहण के साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन की औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं।

कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह? एक खिलाड़ी से मुख्यमंत्री तक का सफर

युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में एक प्रतिष्ठित और अनुभवी चेहरा हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वह एक राष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे हैं, जिसने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया। उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। उनके पास संसदीय कार्यों का लंबा अनुभव है; वह 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) की महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, एन. बीरेन सिंह की पिछली सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में कई अहम विभागों का कुशलतापूर्वक संचालन किया था।

बीजेपी विधायक दल का भरोसा: भारी बहुमत के साथ संभाली कमान

खेमचंद सिंह का मुख्यमंत्री पद तक पहुँचना उनके प्रति विधायकों के अटूट विश्वास का परिणाम है। मंगलवार को हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। वर्तमान में 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास 37 विधायकों का ठोस समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक है। उनके नेतृत्व को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी हरी झंडी दी, ताकि राज्य में समुदायों के बीच विश्वास बहाली और विकास के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

चुनौतीपूर्ण रहा पिछला एक साल: राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की शुरुआत 13 फरवरी 2025 को हुई थी, जब राज्य में जातीय हिंसा के चलते कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने विधानसभा को निलंबित कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। पिछले एक साल के दौरान केंद्र और राज्य प्रशासन ने समुदायों के बीच शांति स्थापित करने के लिए कई दौर की वार्ता की। गृह मंत्रालय का ताजा फैसला इस बात का संकेत है कि अब राज्य के हालात सामान्य हो रहे हैं और स्थानीय सरकार शासन चलाने में सक्षम है।

नई सरकार की प्राथमिकताएं: शांति बहाली और बुनियादी विकास

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद युमनाम खेमचंद सिंह के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारे को फिर से स्थापित करना है। इसके अलावा, विस्थापित लोगों का पुनर्वास और राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना भी उनके एजेंडे में शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खेमचंद सिंह का शांत और संतुलित व्यक्तित्व मणिपुर के घावों को भरने और विकास की नई इबारत लिखने में मददगार साबित होगा।

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