Manipur Relief Camp : मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद राहत कैंपों में रह रहे विस्थापित लोगों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गंभीर चिंता जताई। अदालत ने राहत कैंपों में कथित अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न के मामलों पर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को सभी संदिग्ध मौतों से संबंधित पूरी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य सचिव से पोस्टमार्टम और मौत के कारणों की जानकारी मांगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि रिपोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत मौत के कारणों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज शामिल किए जाएं। अदालत यह जानना चाहती है कि संदिग्ध मौतों की जांच किस स्तर तक हुई और संबंधित मामलों में क्या कार्रवाई की गई।
यौन हिंसा से जुड़े मामलों पर भी हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पीठ मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और न्यायिक कार्यवाही से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान राहत कैंपों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा, सम्मान और कानूनी सहायता से जुड़े मुद्दे भी सामने आए।
समिति की रिपोर्ट का कोर्ट ने लिया संज्ञान
अदालत ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने राहत कैंपों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और उनकी परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए।
25 संदिग्ध मौतों पर मांगी गई जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से उस जानकारी के बारे में सवाल किया, जिसे समिति ने 4 जुलाई को राहत कैंपों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों के संबंध में मांगा था। कोर्ट ने राज्य सरकार से मीडिया में सामने आई इन सभी 25 संदिग्ध मौतों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
आठ जिलों में 640 मौतों का रिकॉर्ड
अदालत के आदेश में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के आठ जिलों में स्थित राहत कैंपों में कुल 640 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। कोर्ट ने इसी आंकड़े को लेकर राज्य सरकार से सवाल किया कि जब आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, तब इतनी कम संख्या में पोस्टमार्टम क्यों किए गए।
मुआवजे की राशि पर भी अदालत ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में दिए गए मुआवजे को लेकर भी सवाल किया। अदालत ने पूछा कि कई मामलों में केवल 20 हजार से 30 हजार रुपये तक का मुआवजा क्यों दिया गया। कोर्ट ने मौतों के कारणों की उचित जांच और पीड़ित परिवारों को उपलब्ध कराई गई सहायता की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
संदिग्ध मौतों पर FIR और जांच के निर्देश
मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी संदिग्ध मौतों के मामलों में FIR दर्ज की जानी चाहिए। साथ ही मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए उचित और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।
42 SIT कर रही हैं मामलों की जांच
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि मणिपुर के आठ जिलों में 42 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT गठित की गई हैं। उनके अनुसार, कुल 3,020 मामलों की जांच चल रही है और अलग-अलग मामलों में चार्जशीट तथा क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई हैं।
1,135 मामलों में जांच अभी जारी
अदालत को बताया गया कि 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई है। इसके अलावा 1,135 मामलों में जांच जारी है और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है। इससे मामलों की जांच और सुनवाई की वर्तमान स्थिति का विवरण सामने आया।
CBI मामलों के लिए विशेष अदालतों पर विचार
पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने बताया कि गुवाहाटी की स्पेशल कोर्ट में मामलों की सुनवाई सप्ताह में केवल दो दिन हो रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि सप्ताह में दो दिन सुनवाई से भी ट्रायल आगे बढ़ सकता है। हालांकि, अदालत ने CBI मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें बनाने की संभावना पर विचार करने की बात कही।
गुवाहाटी हाई कोर्ट की जरूरतों पर केंद्र को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को गुवाहाटी हाई कोर्ट की आवश्यकताओं पर तत्काल विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने संकेत दिया कि मामलों की सुनवाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक न्यायिक संसाधनों और व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है। राहत कैंपों में संदिग्ध मौतों और हिंसा से जुड़े मामलों में कोर्ट ने जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया को लेकर राज्य से विस्तृत जवाब मांगा है।
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