UPI MDR News : भारत के UPI सिस्टम पर अमेरिका की ट्रेड रिपोर्ट में कुछ चिंताएं जाहिर की गई थीं। रिपोर्ट में अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के लिए भारतीय डिजिटल पेमेंट बाजार में अवसरों और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया। खासतौर पर क्रेडिट कार्ड से जुड़े UPI ट्रांजैक्शन को लेकर अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी का सवाल उठाया गया।
UPI के 30 फीसदी मार्केट शेयर नियम का भी जिक्र
अमेरिकी रिपोर्ट में UPI के 30 फीसदी मार्केट शेयर नियम का भी उल्लेख किया गया। नवंबर 2020 में NPCI ने व्यवस्था बनाई थी कि कोई भी एक थर्ड-पार्टी ऐप UPI के कुल ट्रांजैक्शन में 30 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकेगा। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट बाजार में किसी एक कंपनी के अत्यधिक प्रभुत्व को रोकना था। इस नियम को लागू करने की समयसीमा कई बार बढ़ाई गई और अब दिसंबर 2026 तक की गई है।
MDR और अमेरिकी रिपोर्ट को क्यों जोड़ा गया?
अमेरिकी रिपोर्ट में बाजार पहुंच से जुड़ी चिंताओं के बीच भारत में UPI के कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR से संबंधित नए नियम सामने आए। इसके बाद कुछ रिपोर्ट्स में दोनों घटनाओं के बीच संबंध जोड़ा गया और सवाल उठा कि क्या भारत ने अमेरिकी दबाव में MDR लागू किया है। हालांकि, भारत सरकार के Department of Financial Services यानी DFS ने इस दावे को खारिज किया है।
DFS ने अमेरिकी दबाव के दावे पर क्या कहा?
DFS ने 15 सितंबर 2026 के NPCI सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि नए नियमों को अमेरिकी दबाव का परिणाम बताना सही नहीं है। सरकार के अनुसार, UPI पर क्रेडिट कार्ड से संबंधित ट्रांजैक्शन के लिए फिलहाल केवल RuPay Credit Card को अनुमति दी गई है। ऐसे में नए प्रावधानों से भारतीय RuPay नेटवर्क को बढ़ावा मिलने की बात सामने आती है।
MDR लागू करने के पीछे सरकार की दलील क्या है?
सरकार का कहना है कि UPI के इस्तेमाल में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में सभी कंपनियों के लिए कमाई के अवसर समान नहीं रहे। बड़ी कंपनियां अपनी मजबूत बाजार स्थिति के कारण आगे निकलती गईं, जबकि छोटे पेमेंट प्लेटफॉर्म के सामने कारोबार बनाए रखने की चुनौती रही।
कुछ बड़े Merchant Transactions पर लगेगा MDR
सरकार के अनुसार, कुछ बड़े Merchant Transactions पर MDR लगाने का उद्देश्य पेमेंट कंपनियों के लिए राजस्व का अतिरिक्त माध्यम तैयार करना है। इससे छोटी कंपनियों को कारोबार बढ़ाने और बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य आम ग्राहक से हर UPI भुगतान पर शुल्क वसूलना नहीं है।
क्या अब हर UPI पेमेंट पर शुल्क देना होगा?
ऐसा नहीं है। DFS के अनुसार, UPI को पूरी तरह शुल्क आधारित व्यवस्था नहीं बनाया गया है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा करीब 96 फीसदी Merchant Transactions भी बिना MDR के जारी रहेंगे। MDR केवल निर्धारित और बड़े Merchant Transactions पर लागू होगा।
Debit Card पर MDR क्यों नहीं लगाया गया?
सरकार ने Debit Card को MDR से बाहर रखने का फैसला बरकरार रखा है। इसके पीछे RuPay Debit Card के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की नीति बताई गई है। यानी एक ओर कुछ बड़े UPI Merchant Transactions के लिए MDR की व्यवस्था की गई है, वहीं RuPay Debit Card पर MDR लागू नहीं किया गया है।
30 फीसदी नियम का MDR से क्या संबंध है?
UPI में बाजार हिस्सेदारी को लेकर 30 फीसदी की सीमा महत्वपूर्ण है। इस नियम का उद्देश्य किसी एक थर्ड-पार्टी ऐप को पूरे UPI बाजार पर अत्यधिक नियंत्रण हासिल करने से रोकना है। सरकार के अनुसार, यदि छोटे प्लेटफॉर्म के पास पर्याप्त राजस्व मॉडल नहीं होगा तो उनके लिए बड़े खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है।
अमेरिका की रिपोर्ट और भारत के MDR का संबंध क्या है?
पूरे मामले में अमेरिका की रिपोर्ट और भारत के MDR नियमों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है। अमेरिकी रिपोर्ट में अमेरिकी पेमेंट कंपनियों की बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे उठाए गए, जबकि भारत सरकार का कहना है कि MDR का उद्देश्य घरेलू डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
सरकार का पक्ष क्या है?
DFS का स्पष्ट कहना है कि MDR से जुड़े फैसले अमेरिकी दबाव में नहीं लिए गए। सरकार के मुताबिक नए नियमों का उद्देश्य छोटे पेमेंट खिलाड़ियों के लिए राजस्व का अवसर तैयार करना, बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और भारतीय RuPay नेटवर्क को मजबूत करना है। इसलिए इस पूरे विवाद में मुख्य सवाल अमेरिकी रिपोर्ट नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम के राजस्व और प्रतिस्पर्धी ढांचे से जुड़ा है।
Read More : UPI Charges: ‘मधुमक्खी फूल से शहद लेती है…’ NITI Aayog VC ने चाणक्य का जिक्र कर समझाया MDR