FIFA World Cup: फीफा विश्व कप 2026, जो इस समय अमेरिका में आयोजित हो रहा है, इतिहास में पहली बार 48 टीमों के साथ खेला जा रहा है। फीफा अब 2030 के विश्व कप में टीमों की संख्या को बढ़ाकर 64 करने की योजना बना रहा है, जिसकी मेजबानी मोरक्को, पुर्तगाल और स्पेन करेंगे। हालांकि, इस विस्तार को लेकर भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व हेड कोच मनोलो मारकेज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका स्पष्ट मानना है कि टीमों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी से टूर्नामेंट की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा और खेल का स्तर गिरेगा।

गुणवत्ता बनाम संख्या: फीफा की रणनीति पर उठते सवाल
बार्सीलोना से दिए गए एक साक्षात्कार में मारकेज ने कहा, “मेरी राय इस मामले में काफी अलग है। मुझे यह बढ़ा हुआ विश्व कप बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है। ज्यादा टीमों का सीधा मतलब है कि प्रतियोगिता की कुल गुणवत्ता कम हो जाएगी।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस रफ्तार से फीफा विस्तार कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब सभी 200 देश विश्व कप में खेलते नजर आएंगे। मारकेज का मानना है कि फीफा को ‘क्वांटिटी’ यानी संख्या के बजाय फुटबॉल की ‘क्वालिटी’ यानी खेल के स्तर पर ध्यान देना चाहिए, ताकि खेल की गरिमा और चुनौती बनी रहे।

भारतीय फुटबॉल का भविष्य: शॉर्टकट से बचें, ग्रासरूट पर करें काम
भारतीय फुटबॉल की स्थिति पर चर्चा करते हुए मारकेज ने अपनी बेबाक राय रखी। जुलाई 2025 में अपना कार्यकाल समाप्त करने वाले मारकेज ने स्वीकार किया कि भारतीय मूल के विदेशी खिलाड़ियों को टीम में शामिल करके तत्काल अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसे दीर्घकालिक समाधान मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “विदेशी मूल के खिलाड़ियों पर निर्भर रहना सिर्फ एक शॉर्टकट है, जो लंबे समय तक काम नहीं आएगा।” उनके अनुसार, अगर भारत को वास्तव में विश्व कप के स्तर तक पहुंचना है, तो उसे जमीनी स्तर (ग्रासरूट) पर अपनी नींव मजबूत करनी होगी।
बांग्लादेश से सीखें, युवा प्रतिभाओं को दें प्राथमिकता
मारकेज ने पड़ोसी देश बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की फुटबॉल व्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है। बांग्लादेश हर आयु वर्ग में लगातार सुधार कर रहा है, और भारत को भी इसी तरह की रणनीति अपनानी चाहिए। पूर्व कोच ने जोर दिया कि भारत को केवल सीनियर टीम के बारे में सोचने के बजाय यूथ टूर्नामेंट्स, स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं और युवा खिलाड़ियों के विकास पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा।
कोचिंग और अकादमियों का जाल बिछाने की जरूरत
अपनी बात समाप्त करते हुए मारकेज ने भारतीय फुटबॉल प्रशासन को एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अकादमी प्रणाली, उच्च स्तरीय कोचिंग और बुनियादी ढांचे में निवेश ही एकमात्र रास्ता है। भारत को जब तक जमीनी स्तर से टैलेंट तैयार करने की प्रक्रिया को अनुशासित नहीं करेगा, तब तक विश्व कप खेलना एक सपना ही बना रहेगा। मारकेज की यह टिप्पणी भारतीय फुटबॉल जगत के लिए एक आईना है, जो स्पष्ट करती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और खेल के विस्तार से पहले देश को अपनी योग्यता बढ़ानी होगी।
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