Raipur Protest : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का तूता धरना स्थल इन दिनों एक बेहद मार्मिक और संघर्षपूर्ण दृश्य का गवाह बना हुआ है। शिक्षक बनने का सपना संजोए डीएड अभ्यर्थी पिछले 206 दिनों से कड़ाके की धूप और भारी बारिश के बीच अपना आमरण अनशन जारी रखे हुए हैं। शुक्रवार को प्रदर्शन का मंजर तब और भी भयावह हो गया, जब सैकड़ों युवा बारिश के पानी में जमीन पर दंडवत होकर रेंगते हुए अपना विरोध दर्ज कराने निकले। उनके हाथों में प्रार्थना थी, आंखों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता और जुबान पर एक ही नारा था—’नियुक्ति दो या मृत्यु दो’। यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि उन युवाओं की व्यथा है जो अपनी योग्यता सिद्ध करने के बाद भी रोजगार के लिए तरस रहे हैं।

206 दिनों का लंबा इंतजार और प्रशासनिक उपेक्षा
डीएड अभ्यर्थियों का यह आमरण अनशन 24 दिसंबर 2025 से निरंतर जारी है। अभ्यर्थियों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि राज्य में शिक्षक भर्ती के 2,300 रिक्त पद उपलब्ध होने के बावजूद सरकार नियुक्ति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रही है। उनका आरोप है कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। 206 दिनों की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने से इन युवाओं का सब्र का बांध अब टूटने लगा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की यह चुप्पी उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

विधानसभा कूच की कोशिश और पुलिस की सख्ती
शुक्रवार को भारी बारिश के बीच जब प्रदर्शनकारी युवाओं ने अपनी आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने के लिए विधानसभा की ओर कूच किया, तो उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच, युवा जमीन पर लेटकर ही अपनी मांगों के नारे लगाते रहे। सुरक्षा के कड़े घेरे में घिरे इन युवाओं ने व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया। बाद में, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं बैठकर अपना मांग पत्र सौंपा। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं को भी अब पुलिसिया सख्ती का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार से न्याय की गुहार: तीन प्रमुख मांगे
डीएड अभ्यर्थी संघ ने सरकार के समक्ष अपनी तीन सूत्रीय मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं। उनकी पहली मांग है कि न्यायालय के आदेशों का अविलंब पालन करते हुए 2,300 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तत्काल पूरा किया जाए। दूसरी मांग, सरकार को इन अभ्यर्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग, 206 दिनों से चल रहे इस आंदोलन का मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए समाधान निकाला जाए। इन अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि यह लड़ाई महज रोजगार की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और संविधान में विश्वास बनाए रखने की है। जब अदालतों के आदेशों की अनदेखी होती है, तो युवाओं का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन युवाओं की पुकार सुनकर कोई ठोस कदम उठाएगी या इनका संघर्ष और लंबा खिंचेगा।
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