MCB Land Dispute : एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के नागपुर चौकी क्षेत्र में जमीन के सीमांकन की एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया ने उस समय विवादित मोड़ ले लिया जब नायब तहसीलदार समीर शर्मा और शरद जायसवाल नामक एक व्यक्ति के बीच गंभीर तनातनी हो गई। घटना के अनुसार, सीमांकन के दौरान प्रशासन की टीम द्वारा नाली निर्माण के लिए जमीन की मांग की गई, जिसके बाद विवाद की शुरुआत हुई। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस चौकी तक पहुंच गया और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया। दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों ने इस मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है।

पीड़ित का आरोप: प्रशासन द्वारा की गई अनुचित कार्रवाई
पीड़ित शरद जायसवाल का आरोप है कि सीमांकन करने आई टीम में आरआई और पटवारी ने उनसे नाली निर्माण के लिए अपनी जमीन छोड़ने को कहा। शरद का कहना है कि वे भाईचारे के नाते सहयोग करने को तैयार थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी पट्टे की जमीन पर अवैध कब्जे का दावा कर दबाव बनाना शुरू कर दिया। शरद के अनुसार, नायब तहसीलदार समीर शर्मा ने अत्यंत उग्र रुख अपनाते हुए मौके पर ही कुदाल और फावड़े मंगवाकर नाली बनाने का आदेश दे दिया। उनका आरोप है कि तहसीलदार ने न केवल उनके साथ अनुचित व्यवहार किया, बल्कि बिना किसी ठोस कानूनी आधार के पुलिस बुलवाकर उन्हें चौकी ले जाया गया, जहाँ उन्हें करीब तीन घंटे तक हिरासत में रखा गया।

पुलिस का पक्ष: शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार ने नागपुर चौकी से पुलिस बल को मौके पर बुलाया। नागपुर चौकी प्रभारी शेषनारायण सिंह ने जानकारी दी कि नायब तहसीलदार की शिकायत पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से शरद जायसवाल को चौकी लाया गया था। हालांकि, जांच-पड़ताल और पूछताछ के बाद उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया और उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस का मानना है कि प्रशासनिक कार्य में बाधा उत्पन्न होने की आशंका के कारण एहतियाती कदम उठाना पड़ा, जिससे स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
नायब तहसीलदार का स्पष्टीकरण: आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, नायब तहसीलदार समीर शर्मा ने शरद जायसवाल द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने दावा किया कि वे स्वयं शरद जायसवाल के बुलावे पर नागपुर पहुंचे थे ताकि सीमांकन प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। तहसीलदार का तर्क है कि सीमांकन के दौरान शरद जायसवाल का व्यवहार काफी उग्र और आक्रामक हो गया था, जिससे सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए ही पुलिस की सहायता ली गई थी। प्रशासन और नागरिक के बीच हुए इस विवाद ने एक बार फिर से सीमांकन जैसी संवेदनशीलता वाली प्रक्रियाओं के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता के मुद्दों को सामने ला खड़ा किया है।
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