Microsoft Layoffs : दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। एक तरफ कंपनियां रिकॉर्ड कमाई कर रही हैं, तो दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के विकल्प दिए जा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आई है। कंपनी अपने करीब 60 हजार कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी एग्जिट ऑफर लेकर आई है। इसके तहत कर्मचारी अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ सकते हैं और निर्धारित शर्तों के अनुसार उन्हें आर्थिक लाभ दिया जा सकता है।माइक्रोसॉफ्ट के दुनियाभर में लगभग 2.23 लाख फुलटाइम कर्मचारी हैं। कंपनी का अनुमान है कि करीब 3 हजार या इससे कम कर्मचारी इस ऑफर को स्वीकार कर सकते हैं। हालांकि, इसे पारंपरिक छंटनी नहीं कहा जा रहा है, लेकिन यह कंपनी की कार्यबल को कम करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
92.3 अरब डॉलर की कमाई, फिर कर्मचारियों को क्यों छोड़नी पड़ रही नौकरी?
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि माइक्रोसॉफ्ट ने कर्मचारियों को स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने का विकल्प ऐसे समय दिया है, जब उसका कारोबार शानदार प्रदर्शन कर रहा है। कंपनी ने हाल ही में 92.3 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया है।आमतौर पर माना जाता है कि जब किसी कंपनी की कमाई बढ़ती है, तो कर्मचारियों के लिए नए अवसर भी पैदा होते हैं। लेकिन टेक इंडस्ट्री में अब यह धारणा बदलती दिखाई दे रही है। कंपनियां मुनाफा बढ़ने के बावजूद अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रही हैं।

Oracle और Amazon में भी हजारों कर्मचारियों की गई नौकरी
माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है, जो इस तरह की रणनीति अपना रही है। दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटाने के फैसले ले रही हैं।Oracle ने पिछले क्वार्टर में 19.3 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत अधिक था। इसके बावजूद कंपनी ने 30 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की। इसी तरह Amazon का रेवेन्यू 12 प्रतिशत बढ़कर 201.9 अरब डॉलर पहुंच गया, लेकिन इस साल कंपनी के 16 हजार से अधिक कर्मचारियों की नौकरी चली गई।इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि टेक कंपनियों में अब केवल कमाई बढ़ाना ही प्राथमिकता नहीं है, बल्कि कम संसाधनों में ज्यादा काम करने की रणनीति पर भी जोर दिया जा रहा है।

AI बन रहा है नौकरियों में बदलाव की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इस बदलाव की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। माइक्रोसॉफ्ट, Amazon और Oracle जैसी कंपनियां AI तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। इनका उद्देश्य अपने कामकाज में ऑटोमेशन बढ़ाना और कम कर्मचारियों की मदद से ज्यादा उत्पादकता हासिल करना है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में IMI कोलकाता की असिस्टेंट प्रोफेसर रुचि शर्मा के हवाले से बताया गया है कि छंटनी का मतलब हमेशा कारोबार में गिरावट नहीं होता। कई बार कंपनियां भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपनी कार्यप्रणाली बदलती हैं। अब कंपनियों का जोर तेजी से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय खर्च कम करने और कामकाज की क्षमता सुधारने पर है।

AI के दौर में युवाओं के लिए कौन-सी स्किल जरूरी?
AI के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार और भविष्य की नौकरी को लेकर है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI इंसानों की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं करेगा। रचनात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता, ग्राहकों की जरूरतों को समझना और जिम्मेदारी निभाने जैसे कामों में इंसानों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।ऐसे में युवाओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें प्रोग्रामिंग, डेटाबेस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की मजबूत समझ विकसित करनी चाहिए।
Claude और Codex जैसे AI टूल्स से सीखें नई तकनीक
छात्र अपनी तकनीकी जानकारी बढ़ाने के लिए Claude और Codex जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनकी मदद से कोडिंग सीखने, गलतियों को समझने, कोड में सुधार करने और नए प्रोजेक्ट तैयार करने में सहायता मिल सकती है।कुल मिलाकर AI का दौर नौकरी के बाजार को तेजी से बदल रहा है। आने वाले समय में उन्हीं युवाओं के लिए बेहतर अवसर होंगे, जो नई तकनीक के साथ अपनी रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता को भी मजबूत बनाएंगे।

