Rahul Gandhi Debate Challenge : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर आमने-सामने बहस करने की चुनौती दी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अपनी पसंद का कोई भी मंच और जगह चुन सकते हैं, वह उनसे हर मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि आखिर कौन राष्ट्रविरोधी है और किसके विदेशी ताकतों के साथ संबंध हैं? उन्होंने कहा कि इन संबंधों की वास्तविक प्रकृति भी सार्वजनिक होनी चाहिए। राहुल ने प्रधानमंत्री से जल्द से जल्द बहस करने की अपील की।
राहुल बोले- मोहन भागवत को भी बना सकते हैं जज
राहुल गांधी ने बहस के लिए एक विशेष व्यवस्था का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि बहस में दोनों नेता आमने-सामने बैठेंगे और वहां मीडिया के साथ देश के युवा भी मौजूद रहेंगे। एक टेबल होगी, जिसके एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ वह स्वयं बैठेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि बहस का फैसला सुनाने के लिए प्रधानमंत्री अपनी पसंद का कोई भी व्यक्ति नियुक्त कर सकते हैं। यहां तक कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी जज बनाया जा सकता है। राहुल के इस बयान को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अमित शाह ने संसद में विशेष सत्र बुलाने की दी थी चुनौती
दरअसल, राहुल गांधी की यह चुनौती केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद आई है। अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद का विशेष सत्र बुलाकर ईवीएम और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR जैसे मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी थी।शाह ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि वह संविधान को हाथ में लेकर चलते हैं, लेकिन उसका सम्मान नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा था कि विपक्ष संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने नहीं देता। गृह मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया।

निर्मला सीतारमण का पलटवार- बहस के लिए संसद पहले से मौजूद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी की चुनौती पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री से बहस के लिए मंच और जगह चुनने को कह रहे हैं, जबकि इसके लिए संसद पहले से मौजूद है। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और संसद में ही राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।सीतारमण ने कहा कि अमित शाह पहले ही SIR और EVM जैसे मुद्दों पर विशेष सत्र में बहस करने की पेशकश कर चुके हैं। ऐसे में राहुल गांधी सोशल मीडिया पर चुनौती देने के बजाय संसद में चर्चा के लिए उतना ही उत्साह क्यों नहीं दिखाते?
जवाब मांगने के साथ जवाब सुनने की जिम्मेदारी भी
निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करने वालों को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान भी करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के नारे ‘डरो मत’ का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उनके पास तथ्य हैं तो उन्हें सदन में रखना चाहिए, जांच का सामना करना चाहिए और दूसरों के जवाब भी सुनने चाहिए।

JDU ने भी राहुल गांधी से अमित शाह की चुनौती स्वीकारने को कहा
इस राजनीतिक विवाद में जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी शामिल हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यदि राहुल गांधी को संसदीय लोकतंत्र में विश्वास है तो उन्हें अमित शाह की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए और संसद में अपने मुद्दे उठाने चाहिए।
कांग्रेस ने SIR रोकने और CEC के इस्तीफे की रखी मांग
दूसरी तरफ कांग्रेस ने अमित शाह के प्रस्ताव पर पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि यदि गृह मंत्री वास्तव में इस मुद्दे पर गंभीर हैं तो उन्हें पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित करना चाहिए और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया स्थगित करनी चाहिए।इस तरह राहुल गांधी की बहस की चुनौती से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब संसद, EVM, SIR और चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के बीच आमने-सामने बहस हो पाएगी या यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहेगा।

