US Iran Relations 2026 : अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर दो बड़े ऐलान किए हैं। चुनाव में अपनी रिपब्लिकन पार्टी को लगे झटके के तुरंत बाद ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव कम करने और इजराइल को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बंद करने का संकेत दिया है। उनके इन फैसलों को अमेरिकी राजनीति और पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
ईरान पर हमले की योजना नहीं, शांति वार्ता की तैयारी
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान पर दोबारा हमला करने की अमेरिका की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और शांति वार्ता के लिए जल्द ही तारीख निर्धारित की जा सकती है। ट्रंप के मुताबिक, मौजूदा स्थिति अच्छी है और अमेरिका बातचीत के जरिए आगे का रास्ता तलाश रहा है। उन्होंने कहा कि बातचीत का परिणाम क्या होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

इजराइल को सालाना 4 अरब डॉलर की मदद बंद करने का ऐलान
ईरान को लेकर नरम रुख अपनाने के साथ ही ट्रंप ने इजराइल को मिलने वाली अमेरिकी आर्थिक सहायता पर भी बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री को इस फैसले की जानकारी दे दी गई है। अमेरिका अब इजराइल को आगे आर्थिक मदद नहीं देगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इजराइल को हथियार बेचने के लिए तैयार रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल को मिलने वाली सालाना सहायता करीब 4 अरब डॉलर है।

मतदान से पहले केशम द्वीप पर हुआ था अमेरिकी हमला
गौरतलब है कि अमेरिकी चुनाव से पहले 2 नवंबर को ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला हुआ था। यह कार्रवाई मिडटर्म इलेक्शन के लिए मतदान से ठीक पहले हुई थी। माना जा रहा था कि ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ट्रंप की राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है, लेकिन चुनावी नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी को इसका कोई स्पष्ट फायदा नहीं मिला। इसके उलट डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में बढ़त हासिल कर ली।
कांग्रेस में बहुमत गंवाना ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती
चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी संसद में ट्रंप की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत होने से राष्ट्रपति के फैसलों पर निगरानी और विरोध बढ़ने की संभावना है। सीनेट में भी रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति कमजोर होने का आकलन सामने आया है। ऐसी परिस्थितियों में ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई शुरू करना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस उनके फैसलों की समीक्षा कर सकती है और युद्ध से जुड़े प्रस्तावों पर राजनीतिक दबाव बना सकती है।

महंगाई और ईरान युद्ध बना चुनाव में हार का कारण
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे महंगाई एक बड़ा मुद्दा रही। ईरान के साथ तनाव और युद्ध से जुड़ी परिस्थितियों के कारण अमेरिकी नागरिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा। आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी और आर्थिक असंतोष ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। ट्रंप प्रशासन इन समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाया, जिसका असर मतदाताओं के फैसले में दिखाई दिया।
नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति भी फैसले की वजह?
इजराइल की घरेलू राजनीति भी ट्रंप के फैसले से जुड़ा एक संभावित कारण मानी जा रही है। वहां बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी को चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति ने राजनीतिक समीकरणों को जटिल बनाया है। गठबंधन की संभावनाओं के बीच गादी आइजनकोट का नाम भी चर्चा में है। ऐसे में अमेरिका की ओर से इजराइल को आर्थिक सहायता बंद करने के ऐलान को बदलते राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
ट्रंप के फैसलों से पश्चिम एशिया की राजनीति में नया मोड़
कुल मिलाकर अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने ट्रंप की घरेलू और विदेश नीति दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है। ईरान के साथ शांति वार्ता की तैयारी और इजराइल की आर्थिक मदद रोकने का ऐलान इसी बदले राजनीतिक माहौल का संकेत हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच वास्तव में बातचीत से तनाव कम होगा या पश्चिम एशिया में नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे।

