Mobile-Laptop Posture: आज के डिजिटल दौर में सुबह उठने से लेकर रात तक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर का इस्तेमाल आम हो गया है। पढ़ाई, ऑफिस का काम या मनोरंजन, दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने गुजरता है। इसी दौरान कई लोगों में स्क्रीन की तरफ झुककर बैठने की आदत विकसित हो जाती है। शुरुआत में इसका खास असर महसूस नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक इसी मुद्रा में बैठने से गर्दन, कंधों और पीठ में खिंचाव और दर्द की समस्या हो सकती है।
पीठ का गोल दिखना हमेशा रीढ़ की बीमारी नहीं
कई लोगों को समय के साथ महसूस होता है कि उनकी पीठ पहले की तुलना में ज्यादा गोल दिखाई दे रही है। हालांकि, हर झुका हुआ पोश्चर रीढ़ की स्थायी समस्या का संकेत नहीं होता। कई बार गलत तरीके से बैठने, स्क्रीन की ऊंचाई सही न होने और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से शरीर की मुद्रा बदलती हुई नजर आ सकती है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक डॉ. सुनील दाचेपल्ली भी खराब पोश्चर और स्थायी रीढ़ संबंधी समस्या के बीच अंतर समझने की सलाह देते हैं।
स्क्रीन देखते समय शरीर आगे की ओर क्यों झुकता है?
मोबाइल को नीचे रखकर देखने या लैपटॉप को बहुत कम ऊंचाई पर रखकर काम करने से सिर और गर्दन आगे की ओर झुकने लगते हैं। कुछ समय बाद शरीर इसी स्थिति को सामान्य मानने लगता है। अगर रोजाना कई घंटे इस मुद्रा में बिताए जाएं, तो पीठ और पेट की मांसपेशियों पर भी दबाव पड़ सकता है। मांसपेशियों की कमजोरी और छाती के हिस्से में खिंचाव के कारण सीधा बैठना पहले की तुलना में मुश्किल महसूस हो सकता है।
खुद जांचें कि समस्या पोश्चर की आदत है या कुछ और
पोश्चर को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि क्या जानबूझकर सीधा खड़े होने या बैठने पर पीठ का गोलापन कम हो जाता है। अगर ऐसा होता है, तो समस्या खराब बैठने की आदत से जुड़ी हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि रीढ़ में कोई स्थायी बदलाव हो गया है। काम करने की जगह, बैठने का तरीका और पीठ व पेट की मांसपेशियों की ताकत भी शरीर की मुद्रा को प्रभावित कर सकती है।
लगातार दर्द और सुन्नपन जैसे संकेतों को न करें नजरअंदाज
अगर गर्दन या पीठ का दर्द लगातार बना हुआ है या समय के साथ बढ़ रहा है, तो इसे केवल मोबाइल या लैपटॉप के इस्तेमाल का नतीजा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीधे खड़े होने में परेशानी, हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट, कमजोरी, शरीर में अधिक अकड़न, चलने-फिरने में दिक्कत या रीढ़ के आकार में लगातार बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
स्क्रीन की ऊंचाई और बैठने की मुद्रा पर दें ध्यान
पोश्चर सुधारने की शुरुआत रोजमर्रा की छोटी आदतों से की जा सकती है। लैपटॉप को बहुत नीचे रखकर काम करने से बचें और मोबाइल इस्तेमाल करते समय गर्दन को लंबे समय तक नीचे झुकाकर न रखें। स्क्रीन की स्थिति ऐसी रखने की कोशिश करें जिससे शरीर को लगातार आगे की ओर झुकना न पड़े।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठे रहें
लगातार कई घंटे बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना और शरीर को आराम देना जरूरी है। हल्की स्ट्रेचिंग को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज भी मददगार हो सकती हैं। हालांकि, पोश्चर सुधारने का मतलब पूरे दिन शरीर को जबरदस्ती अकड़ाकर रखना नहीं है।
शरीर की स्थिति पर लगातार ध्यान देना जरूरी
बेहतर पोश्चर के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठे रहें। मोबाइल और लैपटॉप के बढ़ते इस्तेमाल के बीच स्क्रीन की ऊंचाई, बैठने की मुद्रा और नियमित ब्रेक पर ध्यान देना फायदेमंद हो सकता है। अगर दर्द या अन्य चेतावनी वाले लक्षण लगातार बने रहें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।
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