SAARC Politics 2025: बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर एक विवादास्पद टिप्पणी कर दी है, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्ते और अधिक बिगड़ सकते हैं। न्यूयॉर्क में दिए गए एक बयान में यूनुस ने कहा कि “भारत को पिछले साल बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलनों से आपत्ति थी,” जिसके कारण शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत शेख हसीना को संरक्षण दे रहा है, जो बांग्लादेश में अस्थिरता का कारण बन रही हैं।

मोहम्मद यूनुस ने अपने बयान में भारतीय मीडिया पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि भारत ने आंदोलन को “इस्लामिस्ट” और “तालिबानी” रंग देने की कोशिश की, जबकि यह एक लोकतांत्रिक और युवा नेतृत्व वाला विरोध था। उन्होंने कहा, “क्या आप मुझे तालिबानी कहेंगे? वो मुझे तालिबानी चीफ कहते हैं, लेकिन हमें ऐसा कुछ करने की ज़रूरत नहीं है।”

भारत की चिंता और जवाब
भारत पहले भी बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और भारत विरोधी बयानों को लेकर चिंता जता चुका है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा। हाल ही में, भारत ने बांग्लादेश से सख्त शब्दों में कहा था कि पड़ोसी देशों में आतंरिक अस्थिरता का प्रभाव सीमा पार न हो।
SAARC को लेकर भारत पर आरोप
मोहम्मद यूनुस ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की निष्क्रियता का ठीकरा भी भारत पर फोड़ा। उन्होंने कहा, “SAARC पिछले एक दशक से निष्क्रिय है क्योंकि यह एक देश की राजनीति में फिट नहीं बैठता।” यह बात पाकिस्तान की उस मांग के अनुरूप है जिसमें वह SAARC को फिर से सक्रिय करने की बात करता रहा है। यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश क्षेत्रीय व्यापार और समुद्री संपर्क के लिए एक “पुल” की भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए पूरे क्षेत्र में सहयोग की आवश्यकता है।
क्या बदल सकते हैं संबंध?
बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की भारत के प्रति आलोचनात्मक नीति और शेख हसीना के समर्थन में भारत की भूमिका, दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा में ले जा सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर मोहम्मद यूनुस की सरकार इस रुख पर कायम रहती है, तो भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा सकता है।
मोहम्मद यूनुस के बयान ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक बार फिर हलचल मचा दी है। जहां एक ओर वह SAARC को पुनर्जीवित करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत के प्रति आक्रामक रुख उनके इरादों पर सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।










