UCC India : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर देश में मुसलमानों के सामने आ रही चुनौतियों और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि हाल ही में संपन्न हुई कार्यकारिणी की बैठक में देशभर के कई ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाकर विध्वंस की कार्रवाई की जा रही है, वह बेहद चिंताजनक है। इलियास ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को एक विशेष एजेंडे के तहत निशाना बनाया जा रहा है और सत्ता में बैठे लोग व भाजपा के नेता जानबूझकर नफरती भाषणों को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि ध्रुवीकरण के जरिए वोट बैंक तैयार किया जा सके।

UCC और वंदे मातरम पर बोर्ड का सख्त रुख
प्रेस वार्ता के दौरान सैयद कासिम रसूल इलियास ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बोर्ड का कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि जिन भी राज्यों में UCC लागू किया गया है या किया जाएगा, बोर्ड उसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगा और इसे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी जाएगी। वंदे मातरम की अनिवार्यता पर भी बोर्ड ने अपना पक्ष स्पष्ट किया। इलियास ने कहा कि उन्हें वंदे मातरम के सम्मान में खड़े होने से कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन इसके गायन को अनिवार्य करना संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने दलील दी कि यह ‘आनंद मठ’ से प्रेरित है और इसमें देवी-देवताओं की वंदना की गई है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद के सिद्धांतों से टकराता है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी पर भी इसे पढ़ने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता।

देशव्यापी अभियान और शांति प्रेमियों के साथ जुड़ाव की रणनीति
मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ रही घटनाओं, लिंचिंग और विध्वंस की कार्रवाइयों के विरोध में AIMPLB अब एक देशव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बोर्ड ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है जो इन तमाम घटनाओं पर एक विस्तृत ‘डिटेल डॉक्यूमेंट’ तैयार करेगी। इस दस्तावेज में लिंचिंग, बुलडोजर कार्रवाई और अन्य दमनकारी नीतियों का पूरा ब्योरा होगा, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। इलियास ने बताया कि इस अभियान के तहत बोर्ड देशभर में शांति चाहने वाले लोगों और अन्य समुदायों के साथ मिलकर सम्मेलन, यात्राएं और सभाएं आयोजित करेगा। इस माध्यम से वे देश के आम नागरिकों तक अपनी बात पहुंचाएंगे और सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार करेंगे।
सेक्युलर दलों की चुप्पी पर बोर्ड का गहरा असंतोष
सैयद कासिम रसूल इलियास ने इस दौरान राजनीतिक दलों, विशेषकर सेक्युलर कहलाने वाली पार्टियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। बोर्ड ने इस बात पर गहरा असंतोष जाहिर किया कि जो राजनीतिक दल खुद को सेक्युलर कहते हैं और जो मुस्लिम समुदाय के वोट पर निर्भर हैं, वे वर्तमान संकट के समय अपनी अपेक्षित भूमिका नहीं निभा रहे हैं। इलियास ने कहा कि इन दलों की चुप्पी ने मुस्लिम समुदाय के भीतर अविश्वास पैदा किया है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वे केवल कानूनी लड़ाई ही नहीं लड़ेंगे, बल्कि अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर भी संघर्ष करेंगे ताकि समुदाय को निशाना बनाने की प्रक्रिया को रोका जा सके। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए अंतिम दम तक लड़ते रहेंगे।
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