Marital Dispute : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक BPSC शिक्षिका की नियुक्ति और उनकी वैवाहिक स्थिति को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जौनपुर निवासी प्रवीण कुमार विश्वकर्मा ने अपनी शिक्षिका पत्नी पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-1) के दौरान विभाग को गलत जानकारी दी और खुद को अविवाहित बताकर नौकरी हासिल की। यह मामला अब न केवल जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के कार्यालय तक पहुंच गया है, बल्कि न्यायालय में भी विचाराधीन है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की चयन प्रक्रिया और दस्तावेजों की सत्यता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

शादी, आर्थिक सहयोग और BPSC में सफलता का सफर
प्रवीण कुमार विश्वकर्मा के अनुसार, उनकी शादी 2 दिसंबर 2022 को हुई थी। उनका दावा है कि विवाह के पश्चात उनकी पत्नी ने BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी शुरू की, जिसमें ससुराल पक्ष ने अपनी ओर से हर संभव आर्थिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान किया। जुलाई 2023 में आयोजित TRE-1 परीक्षा में शिक्षिका को सफलता मिली और नवंबर 2023 में उनकी नियुक्ति मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय दहटोला पहसौल में हुई। उस समय तक सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन नौकरी मिलते ही पारिवारिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।

नौकरी मिलते ही रिश्तों में आई दरार और दूरी
पति और उनके परिजनों का आरोप है कि शिक्षिका के सरकारी नौकरी पाते ही उनका व्यवहार पूरी तरह से बदल गया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने पति और ससुराल पक्ष से दूरियां बनानी शुरू कर दीं। पहले बातचीत कम हुई और बाद में संप्रेषण के सभी माध्यम लगभग बंद हो गए। अप्रैल 2025 में जब पति प्रवीण अपनी पत्नी से मिलने मुजफ्फरपुर पहुंचे और साथ रहने का आग्रह किया, तो शिक्षिका ने सीधे तौर पर उनके साथ रहने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद से दोनों के बीच संबंध पूरी तरह टूट गए हैं और अब मामला विवाद की पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है।
दस्तावेजों में गलत जानकारी का आरोप और विभागीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता पति और उनके बड़े भाई गुरु प्रसाद विश्वकर्मा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को औपचारिक आवेदन देकर जांच की मांग की है। उनका मुख्य तर्क यह है कि भर्ती के समय दस्तावेजों में अपनी वैवाहिक स्थिति ‘अविवाहित’ दर्शाना विभाग को गुमराह करने जैसा है। परिवार का कहना है कि यह केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए गलत शपथपत्र देने का मामला है। यदि यह आरोप सिद्ध होता है, तो यह शिक्षिका की नौकरी के लिए एक बड़ी कानूनी बाधा बन सकता है।
शिक्षिका का पक्ष और न्यायपालिका की भूमिका
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आईं शिक्षिका ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने पति-पत्नी के बीच के मतभेदों को सुलझाने के लिए कई बार सार्थक प्रयास किए, लेकिन दूसरी ओर से रिश्ते को बचाने की कोई पहल नहीं की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला अब माननीय न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वे इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगी और अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष ही रखेंगी। फिलहाल, सबकी निगाहें विभागीय जांच की रिपोर्ट और अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस नियुक्ति की वैधता क्या है और रिश्तों का भविष्य किस दिशा में जाएगा।










