La Ganesan death : नागालैंड के राज्यपाल ला गणेशन का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने चेन्नई के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया और कहा, “थिरु ला. गणेशन जी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपना जीवन सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित किया। तमिलनाडु में बीजेपी के विस्तार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका तमिल संस्कृति से गहरा जुड़ाव था। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। ऊं शांति।”

राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अहम योगदान
ला गणेशन का जन्म एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने 2023 में नागालैंड के राज्यपाल का पदभार संभाला। इससे पहले वह मणिपुर और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके थे। अपने शुरुआती जीवन में उन्होंने आरएसएस के प्रचारक के रूप में कार्य किया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत किया।

सेवा भावना और सांस्कृतिक जुड़ाव
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में ला गणेशन को उनके सरल स्वभाव और सेवा भावना के लिए जाना जाता था। उन्होंने तमिल संस्कृति के संरक्षण और प्रसार के लिए भी विशेष प्रयास किए। भाजपा संगठन में रहते हुए उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पार्टी की जड़ें मजबूत कीं और युवाओं को राजनीति से जोड़ने का काम किया।
दुर्घटना के बाद बिगड़ी सेहत
ला गणेशन की सेहत अचानक तब बिगड़ी जब वह चेन्नई स्थित अपने घर पर गिर पड़े। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और उन्हें बेहोशी की हालत में तुरंत अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच में आंतरिक चोट की आशंका जताई, जिसके बाद उनका इलाज अपोलो अस्पताल में शुरू हुआ।
डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा था इलाज
ला गणेशन पिछले कई दिनों से डॉक्टरों की सघन निगरानी में थे। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कुछ दिन पहले ही उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी, लेकिन हालत में सुधार न होने के कारण शुक्रवार को उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से नागालैंड, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
राज्य और देश के लिए अपूरणीय क्षति
ला गणेशन का निधन न केवल नागालैंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने राजनीति, समाज सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिया। उनके जाने से भारतीय राजनीति ने एक अनुभवी और समर्पित नेता खो दिया है।










