Trump on Ukraine NATO : रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति की उम्मीद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर यूक्रेन को गहरा झटका दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका यूक्रेन को NATO की सदस्यता नहीं देगा, और सुरक्षा गारंटी से भी साफ इंकार कर दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के लिए रवाना हो चुके हैं।

यूक्रेन की NATO मेंबरशिप की मांग पर अमेरिका का ‘ना’
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की लंबे समय से NATO में पूर्ण या आंशिक सदस्यता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि NATO की सदस्यता से यूक्रेन को रूस के खिलाफ सुरक्षा कवच मिलेगा और यह शांति बहाल करने में भी मददगार होगा। लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका नाटो के माध्यम से यूक्रेन को कोई सुरक्षा गारंटी नहीं देगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने बयान में कहा, “यूक्रेन को NATO में शामिल करना अव्यावहारिक है और यह युद्ध को और अधिक बढ़ावा देगा। उन्हें यूरोपीय संघ से सुरक्षा की उम्मीद करनी चाहिए।”
NATO के भीतर भी नहीं है एकमत
वर्तमान में NATO के 32 सदस्य देशों में यूक्रेन की सदस्यता को लेकर स्पष्ट मतभेद हैं। पोलैंड, लिथुआनिया और रोमानिया जैसे देश यूक्रेन के पक्ष में हैं, जबकि अमेरिका समेत कई बड़े सदस्य देश इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं।
NATO का आर्टिकल-5 कहता है कि किसी एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा। ऐसे में अगर युद्धग्रस्त यूक्रेन को सदस्यता मिलती है, तो NATO को रूस के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप करना पड़ सकता है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ जाएगा।
रूस की पुरानी आपत्ति
रूस शुरू से ही यूक्रेन की NATO सदस्यता का प्रबल विरोधी रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साफ कर चुके हैं कि वे कभी भी यूक्रेन को NATO में शामिल होते नहीं देखना चाहेंगे। पुतिन के मुताबिक, इससे रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन की नाटो सदस्यता की मांग ही रूस-यूक्रेन युद्ध की जड़ है, और रूस इसे हर कीमत पर रोकना चाहता है।
ट्रंप-पुतिन मुलाकात पर टिकी निगाहें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच अलास्का में हो रही यह बैठक सीजफायर और संभावित शांति समझौते को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे, लेकिन ट्रंप ने कहा है कि अंतिम निर्णय पुतिन और जेलेंस्की की सीधी बातचीत से ही होगा। राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान शांति प्रक्रिया को जटिल बना सकता है, खासकर तब जब यूक्रेन पश्चिमी देशों से सुरक्षा गारंटी की उम्मीद लगाए बैठा है। अलास्का बैठक से यदि कोई सीजफायर समझौता निकलता है, तो यह युद्धविराम की दिशा में एक कदम हो सकता है। लेकिन NATO सदस्यता से इंकार के बाद यूक्रेन की रणनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है।










