BJP vs Congress : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले पर आयोजित समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अनुपस्थिति को लेकर बीजेपी ने तीखा हमला बोला। बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्य विपक्षी दल ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर देश का अपमान करने का नया निम्न स्तर छू लिया है।

कांग्रेस का पलटवार – पीएम लाल किले से विपक्ष पर हमला करते हैं
बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 11 वर्षों में स्वतंत्रता दिवस के मंच का उपयोग विपक्ष पर हमला करने के लिए किया है, न कि राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के लिए। सप्पल के मुताबिक, पीएम के भाषणों में यह आभास होता है मानो भारत केवल 2014 में जागा हो।

कांग्रेस का तर्क – ऐतिहासिक योगदान को नकारते हैं पीएम
सप्पल ने उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत के खाद्यान्न, चावल, मसाले और फलों में नंबर वन होने की बात तो कही, लेकिन यह नहीं बताया कि हरित क्रांति इंदिरा गांधी के प्रयासों से संभव हुई, तेल बीज मिशन राजीव गांधी की पहल थी, और श्वेत क्रांति नरसिम्हा राव के समय आई। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री लगातार विपक्ष के योगदान को नकारते हैं।
संविधान की जिम्मेदारी निभाएं पीएम – कांग्रेस
कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान ने प्रधानमंत्री को देश की एकता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर उन्हें विभाजनकारी भाषा से बचना चाहिए। सप्पल ने कहा, “दुर्भाग्य से पिछले 11 वर्षों के अनुभव ने दिखाया है कि पीएम मोदी इस मंच का उपयोग एकजुटता के बजाय राजनीतिक हमलों के लिए करते हैं।”
बीजेपी का जवाब – राष्ट्रीय पर्व का बहिष्कार अक्षम्य
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा, “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राष्ट्रीय पर्व का बहिष्कार किया। यह लाल किले पर आयोजित देश का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम था, कोई जन्मदिन या पार्टी का आयोजन नहीं।”
सियासी बयानबाजी में तेज़ी
इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। जहां बीजेपी इसे देश के सम्मान से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे पीएम मोदी के राजनीतिक रवैये का परिणाम मान रही है। स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर पर इस तरह का विवाद एक बार फिर भारतीय राजनीति में गहरे मतभेदों को उजागर करता है।










