राजनीति

National Herald Controversy: कर्नाटक में नेशनल हेराल्ड विज्ञापन विवाद, करोड़ों के फंड पर बीजेपी ने उठाए सवाल

National Herald Controversy: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार एक नए विवाद में घिर गई है। आरोप है कि राज्य सरकार ने कांग्रेस पार्टी से जुड़े अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ को विज्ञापन देने के मामले में अन्य स्थापित राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों की तुलना में कहीं अधिक प्राथमिकता दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि डेटा के अनुसार, जिस अखबार का राज्य में न तो कोई व्यापक सर्कुलेशन है और न ही बड़ी पाठक संख्या, उसे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का फंड जारी किया गया है।

नेशनल हेराल्ड पर मेहरबान सरकार: खर्च के चौंकाने वाले आंकड़े

सरकारी रिकॉर्ड से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक सरकार के विज्ञापन बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘नेशनल हेराल्ड’ के खाते में गया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान, राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने विज्ञापन खर्च में इस अखबार को सबसे ऊपर रखा। विशेष रूप से उन समाचार पत्रों की श्रेणी में जो राष्ट्रीय स्तर पर गिने जाते हैं, नेशनल हेराल्ड को मिलने वाली राशि अन्य बड़े मीडिया घरानों से काफी अधिक है।

विज्ञापनों का गणित: 69 फीसदी हिस्सा अकेले एक अखबार को

विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में कर्नाटक सरकार ने नेशनल हेराल्ड को लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपये के विज्ञापन दिए। वहीं, साल 2024-25 में अब तक यह राशि 99 लाख रुपये रही है। सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि साल 2024-25 में कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिकों पर कुल 1 करोड़ 42 लाख रुपये खर्च किए, जिसमें से अकेले 69 प्रतिशत हिस्सा (करीब 99 लाख) नेशनल हेराल्ड को दे दिया गया। शेष 31 प्रतिशत राशि में देश के अन्य सभी बड़े राष्ट्रीय अखबारों को समेट दिया गया।

बीजेपी का तीखा हमला: “करदाताओं के पैसे की खुली लूट”

यह जानकारी सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता डॉ. सीएन अश्वथ नारायण ने इसे ‘करदाताओं के पैसे की खुली लूट’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जब इस अखबार की राज्य में मौजूदगी न के बराबर है और इसे पढ़ने वाले लोग नहीं हैं, तो सरकारी योजनाओं के विज्ञापन इसे क्यों दिए जा रहे हैं? बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस अपनी पार्टी के मुखपत्र को जीवित रखने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग कर रही है।

प्रियांक खरगे का पलटवार: ‘ऑर्गनाइजर’ की फंडिंग का किया जिक्र

बीजेपी के आरोपों का जवाब देने के लिए कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री प्रियांक खरगे ने आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें नेशनल हेराल्ड की चिंता छोड़कर आरएसएस (RSS) की पत्रिका ‘ऑर्गनाइजर’ की फंडिंग और विज्ञापन के बारे में सोचना चाहिए। खरगे ने संकेत दिया कि बीजेपी शासित राज्यों में भी वैचारिक रूप से जुड़े प्रकाशनों को विज्ञापन दिए जाते रहे हैं।

विवाद पर मंत्री का बयान: सवाल उठाना ‘राष्ट्र-विरोधी’

राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने भी बीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए सवाल पूछा कि “नेशनल हेराल्ड को विज्ञापन देने में आखिर गलत क्या है?” खंड्रे यहीं नहीं रुके, उन्होंने विवाद को एक नया मोड़ देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सवाल उठाना ‘राष्ट्र-विरोधी’ मानसिकता को दर्शाता है। उनके अनुसार, नेशनल हेराल्ड का एक गौरवशाली इतिहास रहा है और उसे विज्ञापन देना पूरी तरह से नियमानुसार है।

सरकारी विज्ञापनों की पारदर्शिता पर उठते सवाल

यह पूरा विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। नागरिक समाज और एक्टिविस्ट्स अब सरकारी विज्ञापनों के वितरण में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। नियमतः विज्ञापन उन माध्यमों को दिए जाने चाहिए जिनकी पहुंच जनता तक अधिक हो, ताकि सरकारी योजनाओं की जानकारी सही मायने में लोगों तक पहुँच सके। नेशनल हेराल्ड के मामले में ‘पहुंच बनाम खर्च’ का यह मुद्दा आने वाले दिनों में कोर्ट या लोकायुक्त की दहलीज तक भी पहुँच सकता है।

Thetarget365

Recent Posts

GT vs KKR : शुभमन गिल के तूफान में उड़ी केकेआर, गुजरात टाइटंस की लगातार तीसरी जीत

GT vs KKR :  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का 25वां मुकाबला अहमदाबाद के भव्य…

1 hour ago

Trump vs NATO: “बेकार और कागजी शेर”, होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही ट्रंप ने पुराने सहयोगियों की कर दी सरेआम बेइज्जती!

Trump vs NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है…

1 hour ago

Women Reservation Bill : 11 साल का रिकॉर्ड टूटा; आखिर कैसे ‘विशेष बहुमत’ के चक्रव्यूह में फंसी सरकार?

Women Reservation Bill :  संसद के विशेष सत्र का दूसरा शुक्रवार भारतीय संसदीय इतिहास में…

3 hours ago

Women Reservation Bill : महिला आरक्षण बिल फेल होने के बाद सरकार के पास बचे 5 रास्ते, देखें विश्लेषण!

Women Reservation Bill :  लोकसभा में शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 की शाम भारतीय संसदीय इतिहास…

3 hours ago

Women Reservation Bill : “आरक्षण तो बहाना था, निशाना कुछ और”, महिला आरक्षण बिल गिरने पर राहुल गांधी का बड़ा हमला!

Women Reservation Bill : भारतीय संसदीय इतिहास में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला…

3 hours ago

This website uses cookies.