National Lok Adalat Bastar : छत्तीसगढ़ में न्याय सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने आज प्रदेशव्यापी विशेष लोक अदालत का वर्चुअल माध्यम से औपचारिक उद्घाटन किया। यह आयोजन राज्य के 23 जिलों में एक साथ संचालित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान दंतेवाड़ा में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, अधिवक्ताओं और बड़ी संख्या में न्यायालयीन कर्मचारियों की उपस्थिति रही। इस विशेष लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य चेक अनादरण (धारा 138) से संबंधित लंबित मुकदमों का आपसी सुलह के माध्यम से निपटारा करना है। आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर से लगभग 7,930 ऐसे प्रकरणों को निराकरण के लिए चिन्हित किया गया है।

सुलह-समझौते से न्याय: समय और धन की बचत पर दिया जोर
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि लोक अदालतें आम नागरिकों के लिए न्याय पाने का सबसे सुलभ और प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि चेक बाउंस जैसे मामलों में आपसी सहमति से समाधान होने पर न केवल पक्षकारों का कीमती समय बचता है, बल्कि मुकदमेबाजी पर होने वाले अनावश्यक आर्थिक खर्च से भी उन्हें राहत मिलती है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने न्यायिक अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों को सुलझाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि न्यायालयों में मुकदमों का बोझ कम हो सके और न्यायपालिका की कार्यक्षमता में और सुधार लाया जा सके।

उच्चतम न्यायालय की विशेष लोक अदालत में सहयोग की अपील
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने केवल राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने आगामी 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को उच्चतम न्यायालय में आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के बारे में चर्चा करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों और अधिवक्ताओं से अपील की कि वे लंबित प्रकरणों के आपसी समझौते के आधार पर निपटारे में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें। दंतेवाड़ा दौरे के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने जिला न्यायालय की विभिन्न खंडपीठों और अनुभागों का औचक निरीक्षण भी किया, जहां उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया की कार्यप्रणाली को बारीकी से परखा।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश और न्यायिक पहल की सराहना
लोक अदालत के उद्घाटन के साथ ही मुख्य न्यायाधीश ने सामाजिक सरोकार का संदेश भी दिया। उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत न्यायालय परिसर में रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, जगदलपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत की उन्होंने विशेष रूप से सराहना की। जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में, जहां लोग वर्षों से चेक बाउंस के मामलों के कारण अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर थे, यह पहल उनके जीवन में बड़ी राहत लेकर आई है। आपसी समझौते की इस प्रक्रिया ने न केवल कानूनी जटिलताओं को कम किया है, बल्कि आम जनमानस के बीच न्याय व्यवस्था पर विश्वास को और अधिक मजबूत किया है।
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