NEET Student Death Bastar: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बोधघाट थाना क्षेत्र के आड़ावाल खासपारा में रहने वाली 20 वर्षीय एक होनहार छात्रा ने NEET परीक्षा में मनचाहे परिणाम न मिलने के कारण अपने घर में आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा लिया। छात्रा तीसरी बार इस कठिन परीक्षा में शामिल हुई थी। परीक्षा परिणाम में कम अंक आने से वह मानसिक रूप से बेहद आहत और गहरे सदमे में थी। उसने अपनी जान देने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उसने अपने परिजनों से माफी मांगते हुए यह दुख व्यक्त किया कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई।

पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज का शोकाकुल परिवार को संबल
शनिवार की शाम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने मृतका के निवास पर पहुंचकर शोकाकुल परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस घटना को मात्र एक व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी विफलता करार दिया। परिजनों ने दीपक बैज को बताया कि छात्रा बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थी और उसके दादाजी का सपना था कि वह एक डॉक्टर बने। पिछले कुछ वर्षों में देश भर में पेपर लीक जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारण न केवल छात्रों का मनोबल टूटा है, बल्कि उनकी मेहनत पर भी पानी फिर गया है। छात्रा के परिवार ने बताया कि बार-बार की इन विफलताओं और व्यवस्थागत खामियों ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था, जिसके चलते उसने यह कठोर निर्णय ले लिया।

परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
दीपक बैज ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि देशभर में परीक्षा प्रणाली और मानसिक दबाव के कारण न जाने कितने छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को परीक्षा तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। बैज के अनुसार, जिस तरह से आए दिन प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, उससे युवाओं में असुरक्षा का भाव पैदा हो रहा है। उन्होंने शिक्षा के नाम पर बच्चों पर डाले जा रहे अत्यधिक दबाव और परीक्षा प्रणाली की खामियों को युवाओं की मौत का मुख्य कारण बताया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करे।
आशा की किरण: निराशा के क्षणों में मदद का हाथ
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने युवाओं की मानसिक स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। यदि किसी के मन में निराशा के विचार आ रहे हैं, या कोई अपने किसी प्रियजन की मानसिक स्थिति को लेकर चिंतित है, तो उसे मदद मांगने में संकोच नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, भावनात्मक समर्थन जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। स्नेहा फाउंडेशन की हेल्पलाइन (04424640050) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की आईकॉल हेल्पलाइन (9152987821) जैसी संस्थाएं चौबीसों घंटे या निर्धारित समय पर सहायता के लिए मौजूद हैं। अपनों से बात करना और सही समय पर परामर्श लेना एक सुरक्षित भविष्य की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
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