China US Rivalry: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती नौसेना चीन और दशकों से समुद्री ताकत का बादशाह अमेरिका के बीच एक नई जंग छिड़ चुकी है। समुद्र के नीचे और धरती के ऊपर दोनों देशों के बीच टकराव का असर हिंद-प्रशांत की राजनीति और सुरक्षा पर गहरा पड़ सकता है। क्या यह टकराव सिर्फ जहाजों तक सीमित रहेगा या इससे क्षेत्र में भूचाल आएगा? और यदि टकराव होता है तो इसका भारत और इंडो-पैसिफिक देशों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं इस बढ़ती जियोपॉलिटिकल जंग की पूरी कहानी।
पीले सागर के तट पर बसे डालियान का सुवोयुवान पार्क अब चीन की नौसेना विस्तार की प्रतीक बन चुका है। यहां के विशाल शिपयार्ड्स में हर महीने नए युद्धपोत और कमर्शियल जहाज बनाए जाते हैं। डालियान चीन की समुद्री ताकत का केंद्र है, जो अमेरिका के लिए चिंता का विषय भी बन गया है। लंदन के इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ के विशेषज्ञ निक चाइल्ड्स के मुताबिक, चीन की शिपबिल्डिंग क्षमता अमेरिका की कुल क्षमता से 200 गुना ज्यादा है। यह न केवल संख्या, बल्कि निर्माण की गति और तकनीक के मामले में भी चीन को आगे ला रही है।
चीन सिर्फ युद्धपोत बनाने में ही नहीं बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार में भी अग्रणी है। 2025 में विश्व के 60 प्रतिशत से ज्यादा जहाजों के निर्माण के ऑर्डर चीन के पास हैं। दुनिया के 10 सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से 7 चीन के नियंत्रण में हैं। यह स्थिति चीन को आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूपों में सशक्त बनाती है, जिससे वह वैश्विक समुद्री मार्गों पर अपनी शर्तें थोप सकता है।
पिछले 15 वर्षों में चीन की नौसेना ने अभूतपूर्व विस्तार किया है। 2010 में चीन के पास लगभग 220 युद्धपोत थे, जो 2024 तक बढ़कर 370 से ऊपर पहुंच गए। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, अगले दस साल में यह संख्या 475 तक पहुंच सकती है। चीन के पास अब तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं—लियाओनिंग, शानदोंग और नवीनतम फुजियान, जो पूरी तरह घरेलू तकनीक से बना है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की “चाइना ड्रीम” में समुद्री वर्चस्व हासिल करना शामिल है, और वे चाहते हैं कि चीन समुद्री नियमों का निर्धारण करे।
चीन ने न केवल जहाजों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस युद्धपोत भी शामिल किए हैं। Type 055 डेस्ट्रॉयर, दुनिया के सबसे घातक युद्धपोतों में से एक, अब चीनी नौसेना की शान बन चुका है।
जहां चीन नौसेना की संख्या और विस्तार में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं अमेरिका तकनीक और अनुभव के मामले में अभी भी लीडर है। अमेरिकी नौसेना के पास 11 सुपरकैरीयर हैं, जो किसी भी देश के मुकाबले अधिक हैं। अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी समुद्री प्रभुता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्षेत्र में “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” सुनिश्चित करेंगे और चीन की एकतरफा कार्रवाइयों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाल ही में साउथ चाइना सी में अमेरिकी और चीनी जहाज आमने-सामने आ गए थे, जिससे तनाव और बढ़ गया। अमेरिका लगातार ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन ऑपरेशन’ कर रहा है, जो चीन के दावों को चुनौती देने के लिए है।
2010 के बाद चीन ने हर साल औसतन 10-12 युद्धपोत लॉन्च किए हैं। 2016 में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बावजूद, जिसने चीन के दक्षिण चीन सागर पर दावों को खारिज किया था, चीन ने इसे मानने से इनकार किया। 2023-24 में चीन ने Paracel और Spratly Islands पर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई, और कई बार क्षेत्रीय देशों जैसे फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया के साथ टकराव हुआ। मई 2025 में फिलीपींस के सप्लाई बोट्स पर वाटर कैनन का इस्तेमाल करना इसके सबूत हैं।
चीन का कहना है कि दक्षिण चीन सागर पर उसका संप्रभु अधिकार ऐतिहासिक और कानूनी है, लेकिन इस क्षेत्र की बढ़ती आक्रामकता से क्षेत्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज दुनिया का सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल हॉटस्पॉट बन चुका है। इस क्षेत्र में हर साल 50 प्रतिशत से ज्यादा वैश्विक व्यापार होता है, जिसमें भारत का भी बड़ा हिस्सा है। चीन की आक्रामकता से जापान, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और भारत सभी सतर्क हैं।
भारत के पूर्व नौसेना प्रमुख Admiral Karambir Singh का मानना है कि भारत की हिंद महासागर में मौजूदगी और ताकत चीन की हरकतों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
भारत ने अपनी नौसेना को मॉडर्नाइज करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। INS Vikrant के कमीशन के बाद भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हो गए हैं। इसके अलावा P-8I मैरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन और ब्रह्मोस मिसाइल से भारत की नौसैनिक ताकत बढ़ी है।
QUAD (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) का गठबंधन चीन को काउंटर करने के लिए सक्रिय है। जून 2025 में क्वाड ने ‘Malabar Naval Exercise’ किया, जिसमें सभी देशों की नौसेना ने भाग लिया। यह चीन को साफ संदेश है कि इंडो-पैसिफिक में किसी भी देश को दबदबा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा है, “भारत किसी भी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा और हमारी नौसेना हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
चीन और अमेरिका के बीच नेवल रेस तेजी से बढ़ रही है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत को इस क्षेत्र में अपनी भूमिका और तैयारियों को मजबूत करना होगा ताकि वह किसी भी परिस्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सके। बढ़ती वैश्विक तनाव की इस जंग में भारत की रणनीति और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
Read More : Samsung Galaxy S25 FE vs Apple iPhone 17: कौन-सा स्मार्टफोन आपके लिए है बेहतर विकल्प?
Sonia Gandhi News: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम…
Strait of Hormuz Closed : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध एक बार…
PM Modi Address : महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में मचे घमासान…
Women Reservation Bill : संसद के विशेष सत्र में उस समय एक ऐतिहासिक गतिरोध पैदा…
US Iran Tension 2026 : ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता…
Healthy Gut Summer : तपती गर्मी और उमस भरे मौसम का सबसे बुरा असर हमारे…
This website uses cookies.