NCERT Syllabus : NCERT की 9वीं कक्षा सामाजिक विज्ञान किताब में बड़े बदलाव, नया सिलेबस लागू किया गया

NCERT Syllabus :  राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ नामक नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक जारी की है। इस नई किताब में शिक्षा प्रणाली को अधिक समृद्ध और प्रासंगिक बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे प्रमुख परिवर्तन के रूप में, नई किताब में भारतीय सभ्यता के आधारभूत स्तंभों—वेदों को शामिल किया गया है। अब छात्र ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। यह पहल छात्रों को भारतीय धर्म, दर्शन, समाज और जीवन मूल्यों से परिचित कराने के लिए है, ताकि वे अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा की गहराई को समझ सकें।

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संविधान की प्रस्तावना और शब्दों की व्याख्या में बदलाव

नई पाठ्यपुस्तक में भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) तो दी गई है, लेकिन इससे जुड़ी विस्तृत व्याख्यात्मक सामग्री को संक्षिप्त कर दिया गया है। पिछली पुस्तकों में ‘प्रभुत्व संपन्न’, ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’, ‘लोकतांत्रिक’, ‘स्वतंत्रता’, ‘समानता’ और ‘बंधुत्व’ जैसे शब्दों के अर्थों का जो व्यापक और विस्तृत विवरण दिया जाता था, उसे नई किताब में सीमित किया गया है। छात्रों के लिए उपलब्ध इन व्याख्यात्मक अंशों में कटौती का उद्देश्य पाठ्यक्रम को अधिक केंद्रित बनाना है। हालांकि, यह बदलाव शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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इलेक्शन कमीशन के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) का अध्याय

एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुधार के तहत, NCERT ने अपनी 9वीं कक्षा की किताब में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया को भी शामिल किया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और लोकतंत्र में मतदाता सूची की अहमियत समझाना है। किताब में स्पष्ट किया गया है कि SIR के जरिए कैसे 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं और किन परिस्थितियों में गलतियों को सुधारा जाता है। इसमें मतदाता सूची के प्रकाशन से पूर्व दावे और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया का भी विस्तृत विवरण दिया गया है, जो छात्रों के लोकतांत्रिक साक्षरता के लिए उपयोगी साबित होगा।

राजनीति में महिला आरक्षण और भागीदारी पर चर्चा

नई पुस्तक में समकालीन राजनीतिक मुद्दों को भी प्राथमिकता दी गई है, जिसमें ‘महिला आरक्षण’ और शासन व्यवस्था में उनकी भागीदारी का विशेष उल्लेख है। किताब में इस चिंता को रेखांकित किया गया है कि मतदान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बावजूद, सक्रिय राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी तुलनात्मक रूप से सीमित है। इस अध्याय में स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं का उदाहरण देकर समझाया गया है कि किस प्रकार शासन में महिलाओं की अधिक भागीदारी सकारात्मक सामाजिक और राजनीतिक बदलाव ला सकती है। यह अध्याय छात्रों को लैंगिक समानता के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करेगा।

पाठ्यक्रम में इमरजेंसी के दौर का नया चैप्टर

इतिहास के पन्नों को अधिक व्यापक बनाने के लिए नई पुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) पर एक नया और विस्तृत अध्याय जोड़ा गया है। यह बदलाव छात्रों को देश के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर से परिचित कराने के लिए किया गया है। साथ ही, किताब में समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र से जुड़ी पूर्व में दी गई सैद्धांतिक व्याख्याओं में भी फेरबदल किए गए हैं। कुल मिलाकर, NCERT का यह नया पाठ्यक्रम प्राचीन भारतीय मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है, जो छात्रों को भारतीय समाज की जटिलताओं और उसकी गौरवशाली विरासत को एक साथ समझने का अवसर प्रदान करेगा।

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Chandan Das

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