NCERT Deemed University : भारतीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और स्वायत्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की विशेष सिफारिश पर ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग’ (NCERT) को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा प्रदान किया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अब एनसीईआरटी केवल स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने वाली संस्था मात्र नहीं रहेगी, बल्कि एक उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगी। यह दर्जा मिलने से संस्थान की शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षमताओं में व्यापक विस्तार होने की उम्मीद है।
अधिसूचना के अनुसार, यह प्रतिष्ठित दर्जा यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 3 के अंतर्गत एक ‘स्पेशल कैटेगरी’ में दिया गया है। इससे पहले, यूजीसी की एक विशेषज्ञ समिति ने एनसीईआरटी के कामकाज और उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता की गहन समीक्षा की थी। समिति की सकारात्मक रिपोर्ट के बाद यूजीसी ने कुछ अनिवार्य शर्तों के साथ ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) जारी करने की सिफारिश की थी। शिक्षा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी देते हुए एनसीईआरटी को अनुसंधान, नवाचार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर प्रदान किया है।
एनसीईआरटी को मिले इस नए दर्जे में केवल इसका नई दिल्ली स्थित मुख्यालय ही शामिल नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत आने वाली छह महत्वपूर्ण घटक इकाइयों को भी विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त होगा। ये संस्थान देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं और वर्षों से शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा में योगदान दे रहे हैं:
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), अजमेर, राजस्थान
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), भोपाल, मध्य प्रदेश
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), भुवनेश्वर, ओडिशा
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), मैसूर, कर्नाटक
उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (NERIE), शिलांग, मेघालय
पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल
डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब एनसीईआरटी अपने स्तर पर स्नातक (Undergraduate), स्नातकोत्तर (Postgraduate) और डॉक्टरेट (PhD) की डिग्रियां प्रदान कर सकेगी। अब तक ये क्षेत्रीय संस्थान अपनी डिग्री के लिए स्थानीय राज्य विश्वविद्यालयों पर निर्भर रहते थे। अब एनसीईआरटी को अपने स्वयं के पाठ्यक्रम डिजाइन करने, नए शोध कार्यक्रम शुरू करने और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ सीधे समझौते (MoU) करने की स्वायत्तता मिलेगी। इससे स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के उद्देश्यों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा। डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद एनसीईआरटी ‘रिसर्च-बेस्ड एजुकेशन’ पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी। इससे न केवल शिक्षकों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षण पद्धतियों में नए प्रयोगों को भी बढ़ावा मिलेगा। एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय के रूप में, एनसीईआरटी अब वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक मानकों के अनुरूप खुद को ढाल सकेगी, जिससे भारत की साख पूरी दुनिया में बढ़ेगी।
एनसीईआरटी को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना देश के शैक्षणिक परिदृश्य के लिए एक गौरवशाली क्षण है। यह निर्णय न केवल शिक्षकों और छात्रों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान की संस्कृति को भी पुनर्जीवित करेगा। अब देश के विभिन्न हिस्सों में फैले क्षेत्रीय संस्थान अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार विशेष पाठ्यक्रम तैयार कर सकेंगे, जिससे शिक्षा अधिक समावेशी और प्रभावी बनेगी। सरकार का यह विजन निश्चित रूप से भारत को एक ‘ग्लोबल नॉलेज सुपरपावर’ बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
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