Nishant Kumar Politics
Nishant Kumar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। गुरुवार की सुबह राजधानी पटना में तनावपूर्ण माहौल रहा, जहाँ भारी संख्या में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमा हो गए। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। समर्थकों का स्पष्ट कहना है कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को पांच साल के लिए मुख्यमंत्री चुना है, न कि बीच में पद छोड़कर दिल्ली जाने के लिए। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार को नामांकन दाखिल करने के लिए सदन से बाहर नहीं निकलने देंगे।
एक ओर जहाँ नीतीश कुमार के दिल्ली जाने को लेकर विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री होने जा रही है। आज सुबह 10:30 बजे जेडीयू कार्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, निशांत कुमार को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। पार्टी के भीतर एक बड़ा खेमा यह सुझाव दे रहा है कि यदि परिवार से किसी को उच्च सदन भेजना ही है, तो निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाए, लेकिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार की कमान संभाले रहें। निशांत की एंट्री को जेडीयू में भविष्य के नेतृत्व की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने कार्यकर्ताओं की भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर ने समर्थकों की होली फीकी कर दी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “हजारों कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना एक करके और घर-घर जाकर नीतीश कुमार के नाम पर वोट मांगा था। आज उनसे पूछे बिना यह फैसला कैसे लिया जा सकता है?” पटेल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि नेतृत्व बदलना ही है, तो फिर से चुनाव कराए जाएं। अगर किसी अन्य नेता में इतना दम है, तो वह जनता के बीच जाकर नया बहुमत हासिल करे, वरना नीतीश ही मुख्यमंत्री बने रहें।
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने स्वीकार किया कि प्रदेश की जनता और कार्यकर्ता अपने ‘अभिभावक’ के जाने से बेचैन हैं। हालांकि, उन्होंने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि नीतीश कुमार दल के सर्वोपरि नेता हैं और यदि उन्होंने स्वयं राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है, तो उसे काटना मुश्किल है। इसके बावजूद, वे चाहते हैं कि पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करे। मुख्यमंत्री आवास के बाहर खड़ी महिलाओं और युवाओं की आंखों में आंसू इस बात का प्रमाण हैं कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता जमीन पर अब भी बरकरार है और लोग उन्हें बिहार से दूर नहीं देखना चाहते।
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि बिहार के सत्ता समीकरणों में एक युगांतकारी परिवर्तन है। यदि वे नामांकन दाखिल करते हैं, तो बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलना तय है। ऐसे में जेडीयू कार्यकर्ताओं का यह विद्रोह और निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री, आने वाले दिनों में बिहार एनडीए के भीतर नए शक्ति संघर्ष को जन्म दे सकती है। फिलहाल, पटना की सड़कों पर ‘नीतीश कुमार जिंदाबाद’ के नारों के बीच बिहार का राजनीतिक भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है।
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