North Korea missile base : वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया का चीन से सटी सीमा के बेहद पास एक गुप्त मिसाइल अड्डा है। यह अड्डा चीन की सीमा से महज 27 किलोमीटर (17 मील) दूर स्थित है और इतना बड़ा है कि इसका क्षेत्रफल न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट से भी ज्यादा है।

9 ICBMs और मोबाइल लॉन्चर होने का अनुमान
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल अड्डे पर लगभग 9 परमाणु-सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs) और उनके मोबाइल लॉन्चर मौजूद हो सकते हैं। अड्डे की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से और भी खतरनाक बनाती है, क्योंकि अमेरिका जैसे देशों के लिए इसे सीधे निशाना बनाना बेहद कठिन होगा। ऐसा करने पर उन्हें चीन से टकराव का खतरा उठाना पड़ेगा। तानाशाह किम जोंग उन के नेतृत्व में नॉर्थ कोरिया लगातार अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। हाल के वर्षों में उसने नई मिसाइलें विकसित कीं, कई बार ICBM परीक्षण किए और खुले तौर पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया को परमाणु हमले की धमकी दी।

संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद
साथ सहयोग भी बढ़ाया है। माना जा रहा है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को समर्थन देने के बदले में नॉर्थ कोरिया को तकनीकी सहायता और हथियार विकास में मदद मिल सकती है। यह स्थिति न केवल दक्षिण कोरिया और जापान बल्कि पूरे पूर्वी एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है। यह गुप्त अड्डा सिनपुंग-डोंग क्षेत्र में है, जो चीन की सीमा से बेहद करीब है।
सियोल स्थित प्रोफेसर लीफ़-एरिक इस्ले का कहना है कि नॉर्थ कोरिया जानबूझकर चीन की सीमा के पास ऐसे ठिकाने बना रहा है ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कार्रवाई से रोका जा सके। इस रणनीति का मकसद यह है कि कोई भी सैन्य हमला अनजाने में चीन को नाराज कर सकता है। हालांकि, यह स्थिति बीजिंग के लिए भी असहज हो सकती है, क्योंकि नॉर्थ कोरिया की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षा चीन की सुरक्षा नीति को भी चुनौती देती है।
सैटेलाइट इमेज से खुलासा
रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुप्त ठिकाने का निर्माण 2004 में शुरू हुआ था और 2014 से यह सक्रिय है। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि यहां एंट्री पोस्ट, गोदाम, मुख्यालय भवन, मिसाइल सपोर्ट सुविधाएं और आवासीय ढांचे मौजूद हैं। ठिकाने को छिपाने के लिए इमारतों के गेट पेड़ों और झाड़ियों से ढक दिए गए हैं ताकि सैटेलाइट से आसानी से पहचान न हो सके। संकट की स्थिति में यहां मौजूद मिसाइल लॉन्चर बेस छोड़कर पहले से चुने गए नए स्थानों से मिसाइल दाग सकते हैं। यह रणनीति नॉर्थ कोरिया को फ्लेक्सिबल अटैक ऑप्शन देती है, जिससे उसका मिसाइल प्रोग्राम और खतरनाक हो जाता है।
कौन-सी मिसाइलें तैनात हो सकती हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ठिकाने पर ह्वासोंग-15 या ह्वासोंग-18 ICBM तैनात हो सकते हैं। ये मिसाइलें अमेरिकी जमीन तक मार करने की क्षमता रखती हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि नॉर्थ कोरिया के पास पहले से ही 40 से 50 परमाणु हथियार मौजूद हैं। अगर इनका उपयोग किया गया तो यह न सिर्फ दक्षिण कोरिया और जापान बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गुप्त अड्डे का खुलासा अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए नई चुनौती है। वहीं चीन भी नॉर्थ कोरिया की इस रणनीति से असहज है, क्योंकि यह बीजिंग को अनचाहे संकट में खींच सकता है।
नॉर्थ कोरिया का यह गुप्त मिसाइल अड्डा एक बार फिर साबित करता है कि किम जोंग उन अपने परमाणु कार्यक्रम को किसी भी कीमत पर रोकने वाले नहीं हैं। चीन की सीमा के पास इतनी खतरनाक तैनाती से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव और बढ़ना तय है। सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस खतरे से निपटने के लिए कितना ठोस और एकजुट कदम उठा पाएगा।
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