Odisha saffron controversy: ओडिशा में ‘भगवा रंग’ पर सियासत गर्म, भाजपा सरकार के आदेश से छिड़ा विवाद

Odisha saffron controversy: ओडिशा में भगवा रंग को लेकर एक बार फिर से सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य की भाजपा सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि अब सभी सरकारी इमारतों को भगवा रंग में रंगना अनिवार्य होगा। आदेश के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं।

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सरकार का आदेश: भगवा ही होगा सरकारी रंग

लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा जारी इस निर्देश में कहा गया है कि राज्य की नई और पुरानी सभी सरकारी इमारतें भगवा रंग में रंगी जाएंगी। यह रंग अब सरकारी पहचान का प्रतीक होगा। अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय ‘राज्य सरकार की सोच और दृष्टिकोण को परिलक्षित करता है’।

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हालांकि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार ने इस प्रकार का आदेश दिया हो। अक्टूबर 2024 और मार्च 2025 में भी सरकारी स्कूलों और कार्यालयों के रंग भगवा करने को लेकर आदेश दिए गए थे, जिसके बाद व्यापक विरोध देखने को मिला था।

विपक्ष का हमला: “रंगों की राजनीति बंद करो”

सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्षी दल खासे आक्रोशित हैं। बीजू जनता दल (BJD) ने इसे “ध्यान भटकाने की चाल” बताया। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा,”जब राज्य में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं, प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं और विकास कार्य ठप हैं, तब भाजपा सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए ‘रंग बदलने’ का खेल खेल रही है।” वहीं, कांग्रेस नेता जयदेव जेना ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि “स्कूलों की यूनिफॉर्म से लेकर सरकारी इमारतों के रंग तक, सब कुछ भगवा करना भाजपा की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।”

क्या है रंगों की राजनीति का इतिहास?

ओडिशा का यह विवाद भारत में पहली बार नहीं हुआ है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार ने सत्ता में आने के बाद सभी सरकारी इमारतों और रेलिंगों को नीले-सफेद रंग में रंगने का आदेश दिया था। वहीं, राजस्थान के जयपुर शहर की सभी प्रमुख इमारतें गुलाबी रंग की हैं, जो शहर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा निर्णय है। यानी, राज्यों द्वारा सरकारी पहचान को दर्शाने के लिए रंगों का उपयोग कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह निर्णय राजनीतिक या धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा हो, तो विवाद उठना स्वाभाविक है।

भाजपा की सफाई

अब तक ओडिशा सरकार या भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि “भगवा को सांस्कृतिक और परंपरागत रंग” के रूप में अपनाया गया है, न कि धार्मिक रंग के तौर पर।

ओडिशा में सरकारी इमारतों को भगवा रंगने का निर्णय एक प्रशासनिक फैसला है या राजनीतिक संकेत, यह बहस का विषय बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले समय में यह रंग राजनीतिक दलों के बीच नई चुनावी बहस की ज़मीन तैयार करेगा।

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