Cow meat smuggling : सरगुजा जिला प्रशासन ने गौ-मांस की तस्करी के एक गंभीर मामले में बड़ा निर्णय लेते हुए आरोपी वाहन को राजसात करने का आदेश जारी कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सरगुजा ने बुधवार को आदेश पारित करते हुए वाहन क्रमांक CG15 JD 0616 को छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 5, 10 के उल्लंघन में राजसात करने का निर्णय सुनाया है।

यह मामला उस समय प्रकाश में आया था जब दिनांक 06 मार्च 2024 को आरोपीगण विल्सन तिग्गा व ललित एक्का अपनी जीप वाहन से अंबिकापुर की ओर आ रहे थे। ग्राम सिलसिला के पास लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। घटना स्थल पर भीड़ ने जब वाहन की तलाशी ली तो उसमें बोरी में भरकर रखा गया गौ मांस बरामद हुआ। तत्काल पुलिस ने मामला दर्ज कर वाहन व मांस को जप्त किया।

जांच के दौरान आरोपियों ने यह स्वीकार किया कि वे यह गौ मांस सीतापुर के जजगा गांव निवासी विरेंद्र उर्फ विजेंद्र से लेकर अंबिकापुर ला रहे थे। पुलिस ने घटना स्थल से एक लोहे का चाकू, टांगी और कुल 11 किलो गौ मांस भी बरामद किया, जिसे हैदराबाद स्थित Meat Species Identification Lab भेजा गया।
प्रकरण में पुलिस अधीक्षक सरगुजा द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन व प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर कलेक्टर ने यह माना कि वाहन अवैध गतिविधियों में प्रयुक्त हुआ है और इसे राजसात करना न्यायसंगत है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उक्त वाहन छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण नियम 2014 के नियम-7 के तहत अधिहृत किया गया है।
अनावेदक पक्ष ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दावा किया कि वे इस घटना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थे और उनके विरुद्ध झूठा मामला गढ़ा गया है, परंतु प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट को मद्देनज़र रखते हुए न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
क्या कहता है कानून?
छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम के तहत यदि कोई वाहन गौ-मांस की तस्करी में प्रयुक्त होता है, तो उसे जप्त कर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा राजसात करने की कार्यवाही की जा सकती है। यह कानून राज्य में गोवंश की रक्षा और अवैध मांस व्यापार पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को पशु संरक्षण समर्थकों द्वारा सराहा जा रहा है, वहीं यह मामला एक बार फिर से पशु तस्करी पर लगाम कसने के लिए प्रशासनिक तत्परता का प्रतीक बन गया है।
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