Kawardha Rice Scam: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक बार फिर सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुकदूर थाना क्षेत्र के कोदवागोडान धान उपार्जन केंद्र में 6,000 क्विंटल धान के गायब होने का मामला सामने आया है। इस मामले में तत्कालीन केंद्र प्रभारी रमाशंकर चंद्राकर के खिलाफ अमानत में खयानत का गंभीर आरोप लगा है, और FIR दर्ज कर ली गई है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धान उपार्जन केंद्र कोदवागोडान में प्रभारी के रूप में कार्यरत रमाशंकर चंद्राकर के कार्यकाल के दौरान लगभग ₹1.39 करोड़ रुपये मूल्य का 6,000 क्विंटल धान रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि गायब हुए धान का कोई स्टॉक रजिस्टर में रिकॉर्ड नहीं है और ना ही वह गोदाम में मौजूद है।

यह घोटाला तब उजागर हुआ जब विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित ऑडिट और भौतिक सत्यापन के दौरान धान की कमी पाई गई। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले को धारा 406 (अमानत में खयानत) के तहत दर्ज किया है।
गिरफ्तारी अभी बाकी, जांच जारी
हालांकि, FIR दर्ज होने के बावजूद अभी तक आरोपी रमाशंकर चंद्राकर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू हो गई है और जल्द ही साक्ष्य के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
धान उपार्जन प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
इस बड़े घोटाले के बाद कवर्धा जिले में धान उपार्जन व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हर साल किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जाती है, लेकिन यदि इस तरह से स्टॉक में घोटाला हो तो किसानों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।
यह मामला दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं और भंडारण व्यवस्था में कहीं न कहीं निगरानी की कमी है, जिसका फायदा उठाकर भ्रष्ट अधिकारी सरकारी धन और अनाज की हेराफेरी कर रहे हैं।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक महकमे पर दबाव है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार दोबारा न हो। साथ ही, धान उपार्जन केंद्रों की निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ जैसे कृषि-प्रधान राज्य में जहां किसानों की मेहनत का हर दाना कीमती होता है, वहां इस तरह के घोटाले बेहद चिंताजनक हैं। ₹1.39 करोड़ की धान हेराफेरी न सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यह किसानों की मेहनत और विश्वास का भी अपमान है। अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है।










