Pakistan India talks : पाकिस्तान ने अमेरिका की मध्यस्थता में शामिल होने के दावे को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि उसने भारत से वार्ता के लिए अमेरिका या किसी अन्य देश से मदद नहीं मांगी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में कहा कि इस्लामाबाद कश्मीर समेत सभी अनसुलझे मुद्दों पर भारत से सीधे बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका की मध्यस्थता में उसका कोई हस्तक्षेप नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी बयान से ट्रंप की छवि पर संकट
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने युद्धविराम की मांग की थी। हालांकि, इस युद्धविराम के लिए उन्होंने अमेरिका या किसी अन्य देश की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं बताई। इस बयान ने न केवल पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्होंने युद्धविराम में अपनी मध्यस्थता का पूरा श्रेय लिया था।

भारत ने हमेशा खारिज किया था ट्रंप के दावे
भारत ने शुरू से ही ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को खारिज किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान ने सीधे भारत से ही बातचीत का अनुरोध किया था। क्वाड शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने बताया कि पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने सीधे भारत के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से फोन पर वार्ता की थी। उन्होंने इस दौरान ट्रंप का नाम नहीं लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने कभी अमेरिकी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया।
क्या अमेरिका ने मध्यस्थता को आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने मध्यस्थता के दावे को व्यापारिक हितों के लिए इस्तेमाल किया। भारत पर रूस से तेल खरीदने के आरोप में टैरिफ लगाए गए थे, जो दोनों देशों के बीच तनाव का एक कारण थे। इस राजनीतिक और आर्थिक जटिलता में, ट्रंप की मध्यस्थता की भूमिका को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जो उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग की गई।
पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार देने की भी की थी मांग
पाकिस्तान ने पहले युद्ध समाप्ति के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग भी की थी। अब इस यू-टर्न के साथ ट्रंप की नोबेल पुरस्कार जीतने की संभावनाएं भी कमजोर होती नजर आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचेगा और दक्षिण एशिया में उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होंगे।
पाकिस्तान का यह बयान अमेरिका और ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है। भारत के साथ सीधे वार्ता के लिए तैयार पाकिस्तानी रुख और ट्रंप की मध्यस्थता के दावों का विरोध, दक्षिण एशियाई कूटनीति को नई दिशा दे सकता है। इस मामले में आगे क्या होगा, यह समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल अमेरिका और पाकिस्तान दोनों राजनीतिक दबाव में नजर आ रहे हैं।










