Parliament Weekend Working
Parliament Weekend Working: संसद के बजट सत्र का दूसरा भाग इन दिनों काफी गहमागहमी के बीच चल रहा है। इस बीच, नरेंद्र मोदी सरकार ने विधायी कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विपक्ष के सामने प्रस्ताव रखा है कि इस बार शनिवार और रविवार (वीकेंड) को भी संसद की बैठकें आयोजित की जाएं। आमतौर पर वीकेंड पर सदन की कार्यवाही स्थगित रहती है, लेकिन सरकार चाहती है कि वित्त वर्ष के अंतिम दिनों का अधिकतम उपयोग किया जाए। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य लंबित बिलों पर चर्चा करना और बजट से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को 31 मार्च से पहले अंतिम रूप देना है।
संसदीय सूत्रों के अनुसार, सरकार के पास वर्तमान सत्र में कई महत्वपूर्ण वित्तीय और विधायी कार्य लंबित हैं। मार्च का महीना किसी भी सरकार के लिए वित्तीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह मौजूदा वित्त वर्ष का आखिरी महीना है। सरकार का प्रयास है कि वित्त वर्ष के अंतिम दिन यानी 31 मार्च तक सभी आवश्यक वित्तीय आवंटन और विधेयकों को पारित करवा लिया जाए। इसी कड़ी में, सरकार ने 28 और 29 मार्च को पड़ने वाले शनिवार और रविवार को सदन चलाने का सुझाव दिया है। इससे न केवल कार्यदिवस बढ़ेंगे, बल्कि चर्चा के लिए भी पर्याप्त समय मिल सकेगा।
संसद की बैठकें वीकेंड पर बुलाने के पीछे एक बड़ी वजह मार्च महीने में पड़ने वाले सार्वजनिक अवकाश भी हैं। कैलेंडर के अनुसार, 19 और 20 मार्च को गुड़ी पड़वा और ईद के अवसर पर संसद में अवकाश रहेगा। इसके तुरंत बाद, 26 मार्च को रामनवमी की छुट्टी होने के कारण सदन की कार्यवाही नहीं होगी। इन छुट्टियों के कारण कामकाज के कई महत्वपूर्ण घंटे कम हो रहे हैं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने अवकाश के दिनों यानी वीकेंड पर बैठक बुलाने का विचार किया है। अब गेंद पूरी तरह से विपक्ष के पाले में है कि वह सुचारू कामकाज के लिए इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति देता है या नहीं।
गौरतलब है कि वर्ष 2026 का बजट सत्र 28 जनवरी को राष्ट्रपति के संबोधन के साथ शुरू हुआ था। इस सत्र को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जो 2 अप्रैल 2026 तक चलने वाला है। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को संपन्न हुआ था, जिसके बाद 9 मार्च से दूसरे चरण की शुरुआत हुई। इस दूसरे हिस्से में संसद के भीतर काफी राजनीतिक सरगर्मी देखी गई है। विशेष रूप से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में लंबी और तीखी चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई, जिसका अंत स्पीकर द्वारा दिए गए विस्तृत जवाब के साथ हुआ।
सरकार के इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। विपक्ष अक्सर सरकार पर बिना पर्याप्त चर्चा के बिल पास कराने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्षी दल अतिरिक्त समय देने के इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। यदि सहमति बनती है, तो 28-29 मार्च को संसद में ऐतिहासिक गहमागहमी देखने को मिल सकती है। सरकार का तर्क है कि राष्ट्रहित और वित्तीय स्थिरता के लिए इन बिलों का पास होना जरूरी है, जबकि विपक्ष कार्यदिवस बढ़ाने के बजाय मौजूदा समय के सही उपयोग पर जोर दे सकता है।
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