PM Modi’s mother AI video: पटना हाईकोर्ट का आदेश, पीएम मोदी की मां पर बने AI वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश

PM Modi’s mother AI video: पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां पर बनाए गए एक विवादित एआई (AI) वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने का आदेश दिया है। यह वीडियो बिहार कांग्रेस के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से 10 सितंबर 2025 को साझा किया गया था, जिसे लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद और कानूनी कार्रवाई हुई। क्या था वीडियो में? बिहार कांग्रेस द्वारा साझा किए गए वीडियो को एआई टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किया गया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के बीच एक काल्पनिक संवाद दिखाया गया था। वीडियो में पीएम मोदी की मां उन्हें बिहार से जुड़े मुद्दों पर ‘सुनाती’ हैं। पोस्ट में लिखा गया था – “साहब के सपनों में आईं मां, देखिए रोचक संवाद।” हालांकि कांग्रेस इसे व्यंग्यात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति बता रही थी, लेकिन भाजपा और सहयोगी दलों ने इसे बेहद आपत्तिजनक और अनैतिक करार दिया। कोर्ट ने क्यों दिया हटाने का आदेश? पटना हाईकोर्ट ने इस वीडियो को “असामाजिक, अनैतिक और मानहानिपूर्ण” करार देते हुए इसे तुरंत हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट का मानना है कि यह वीडियो न केवल व्यक्तिगत मर्यादा का उल्लंघन करता है, बल्कि एआई जैसी तकनीक का दुरुपयोग कर जनता को भटकाने और सामाजिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश है। राजनीतिक प्रतिक्रिया जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा,“जो वीडियो कांग्रेस ने डाला था वो सामाजिक और नैतिक अपराध था। अब कोर्ट के निर्देश से ये स्पष्ट हो गया कि यह कानूनी अपराध भी था। प्रधानमंत्री की दिवंगत मां को इस तरह से दिखाना राजनीति के गिरते स्तर और कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है।” दर्ज हुई एफआईआर दिल्ली पुलिस ने इस वीडियो को लेकर बिहार कांग्रेस के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 18(2), 336(3), 336(4), 340(2), 352, 356(2) और 61(2) के तहत दर्ज की गई है।एफआईआर में कहा गया है कि यह वीडियो “डीपफेक” तकनीक के माध्यम से तैयार किया गया और जानबूझकर देश के प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से फैलाया गया। सोशल मीडिया से हटाया गया वीडियो कोर्ट के आदेश के बाद, बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल से विवादित वीडियो को हटा लिया गया है। साथ ही, अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे हटाने की प्रक्रिया जारी है।एआई और डीपफेक तकनीकों का दुरुपयोग अब एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, खासकर जब इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाए। पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करता है, बल्कि आने वाले समय में डिजिटल कंटेंट को लेकर अनुशासन और ज़िम्मेदारी की मिसाल भी पेश करता है। Read More: Amit Malviya Criticism: अमित मालवीय ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों पर साधा निशाना, नेपाल के प्रदर्शन और मतदाता सूची पर उठाए सवाल

PM Modi’s mother AI video: पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां पर बनाए गए एक विवादित एआई (AI) वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने का आदेश दिया है। यह वीडियो बिहार कांग्रेस के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से 10 सितंबर 2025 को साझा किया गया था, जिसे लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद और कानूनी कार्रवाई हुई।

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क्या था वीडियो में?

बिहार कांग्रेस द्वारा साझा किए गए वीडियो को एआई टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किया गया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के बीच एक काल्पनिक संवाद दिखाया गया था। वीडियो में पीएम मोदी की मां उन्हें बिहार से जुड़े मुद्दों पर ‘सुनाती’ हैं। पोस्ट में लिखा गया था – “साहब के सपनों में आईं मां, देखिए रोचक संवाद।”

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हालांकि कांग्रेस इसे व्यंग्यात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति बता रही थी, लेकिन भाजपा और सहयोगी दलों ने इसे बेहद आपत्तिजनक और अनैतिक करार दिया।

कोर्ट ने क्यों दिया हटाने का आदेश?

पटना हाईकोर्ट ने इस वीडियो को “असामाजिक, अनैतिक और मानहानिपूर्ण” करार देते हुए इसे तुरंत हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट का मानना है कि यह वीडियो न केवल व्यक्तिगत मर्यादा का उल्लंघन करता है, बल्कि एआई जैसी तकनीक का दुरुपयोग कर जनता को भटकाने और सामाजिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा,“जो वीडियो कांग्रेस ने डाला था वो सामाजिक और नैतिक अपराध था। अब कोर्ट के निर्देश से ये स्पष्ट हो गया कि यह कानूनी अपराध भी था। प्रधानमंत्री की दिवंगत मां को इस तरह से दिखाना राजनीति के गिरते स्तर और कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है।”

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दर्ज हुई एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने इस वीडियो को लेकर बिहार कांग्रेस के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 18(2), 336(3), 336(4), 340(2), 352, 356(2) और 61(2) के तहत दर्ज की गई है।एफआईआर में कहा गया है कि यह वीडियो “डीपफेक” तकनीक के माध्यम से तैयार किया गया और जानबूझकर देश के प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से फैलाया गया।

सोशल मीडिया से हटाया गया वीडियो

कोर्ट के आदेश के बाद, बिहार कांग्रेस के एक्स हैंडल से विवादित वीडियो को हटा लिया गया है। साथ ही, अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे हटाने की प्रक्रिया जारी है।एआई और डीपफेक तकनीकों का दुरुपयोग अब एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, खासकर जब इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाए। पटना हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करता है, बल्कि आने वाले समय में डिजिटल कंटेंट को लेकर अनुशासन और ज़िम्मेदारी की मिसाल भी पेश करता है।

Read More: Amit Malviya Criticism: अमित मालवीय ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों पर साधा निशाना, नेपाल के प्रदर्शन और मतदाता सूची पर उठाए सवाल

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