Amit Malviya Criticism: अमित मालवीय ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों पर साधा निशाना, नेपाल के प्रदर्शन और मतदाता सूची पर उठाए सवाल

Amit Malviya Criticism: भाजपा के सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी सहित अन्य पूर्व निर्वाचन आयुक्तों पर तीखा हमला किया है। मालवीय ने नेपाल में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन की प्रशंसा करने पर एस.वाई. कुरैशी की आलोचना की है, जो अंततः वहां की सरकार बदलने का कारण बने। साथ ही, उन्होंने पूर्व CEC ओ.पी. रावत और पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा पर भारत में मतदाता सूचियों को सुधारने में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।

ads

नेताओं और पूर्व आयुक्तों के बीच तकरार

पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई. कुरैशी, ओ.पी. रावत और अशोक लवासा ने हाल ही में भारत के विपक्षी नेता राहुल गांधी के चुनावी पंजीकरण में धांधली के आरोपों और बिहार में दस्तावेज़ आधारित विशेष गहन संशोधन (SIR) की आलोचना की थी। इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने कड़ा पलटवार किया है।

ads

मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर कुरैशी के कुछ साक्षात्कार के वीडियो क्लिप शेयर किए। एक वीडियो में कुरैशी ने नेपाल की घटनाओं को “जिन्दा और जीवंत लोकतंत्र” का संकेत बताया था, न कि अराजकता। इसके जवाब में मालवीय ने कहा कि उनके रिकॉर्ड को देखते हुए यह टिप्पणी “लापरवाह” और आश्चर्यजनक नहीं है।

IFES के साथ समझौते पर उठाए सवाल

अमित मालवीय ने बताया कि कुरैशी के कार्यकाल में भारतीय निर्वाचन आयोग ने इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स (IFES) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया था। IFES एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन है, जिसे कई सरकारों द्वारा वित्तपोषित किया जाता है और जिसे जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़ा माना जाता है, जो गहराई से कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार का समर्थन करता है। मालवीय ने इसे भारत की चुनाव प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप के रूप में देखा।

उत्तर प्रदेश चुनावों और मतदाता सूची विवाद

कुरैशी ने उत्तर प्रदेश में एक चुनाव के दौरान मतदान केन्द्रों के अध्यक्षों को उन मतदाताओं की सूची दी थी, जो मृत हो चुके थे या स्थानांतरित हो गए थे। इसका उद्देश्य नकली वोटिंग को रोकना था। उन्होंने यह भी बताया कि एक राजनेता ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बताया था कि चुनाव आयोग ने उनके द्वारा आयोजित नकली वोटों को नाकाम कर दिया था। इस संदर्भ में मालवीय ने सवाल किया कि यदि कुरैशी को ऐसा पता था तो उन्होंने विशेष गहन संशोधन (SIR) क्यों नहीं कराया, जो मतदाता सूची की सफाई के लिए आवश्यक था।

मालवीय का निष्कर्ष

अमित मालवीय ने कहा, “यदि कुरैशी को शिफ्टेड, मृत और अनुपस्थित मतदाताओं के बारे में पता था, तो उनका यह कर्तव्य था कि वे विशेष गहन संशोधन करें। लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुरैशी ने उस अप्रत्यक्ष नेता का संरक्षण क्यों किया जिसने उन्हें बताया था कि नकली वोटिंग को रोका गया।

अमित मालवीय की यह आलोचना राजनीतिक और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर नए विवादों को जन्म दे रही है। यह बहस आगामी चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां मतदाता सूची की सटीकता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व आयुक्तों के साथ भाजपा के इस आरोप-प्रत्यारोप से चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बहस और गहराने की संभावना है।

Read More: Women Unemployment India: देश में तेजी से बढ़ रही महिलाओं की बेरोजगारी, रिपोर्ट से मोदी सरकार हुई परेशान

Admin

Admin

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.