Regime Change : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और विपक्ष के बीच सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने बुधवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष जब रिजीम चेंज की बात करता है तो उसका मतलब किसी गैर-संवैधानिक तरीके से सरकार बदलना नहीं, बल्कि चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन करना है। पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री पहले सरकार को उखाड़ फेंकने की बात करते थे, तब उनका मतलब भी चुनाव के जरिए सत्ता बदलने से ही था।
2012 में मोदी ने भी तत्कालीन सरकार को उखाड़ने की बात कही थी
पवन खेड़ा ने अपने बयान में वर्ष 2012 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की तत्कालीन सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उस समय इस तरह के बयान को लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा माना गया था, तो आज विपक्ष के सत्ता परिवर्तन की बात करने पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है? खेड़ा के मुताबिक, विपक्ष की बातों को गलत संदर्भ में पेश करके वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

हिंदू-मुस्लिम मुद्दों से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जब सरकार के पास विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं होता, तब किसी एक शब्द को पकड़कर विवाद खड़ा किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई दूसरा मुद्दा नहीं मिलता तो हिंदू-मुस्लिम की राजनीति शुरू कर दी जाती है। पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि सत्तापक्ष की यह रणनीति अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है। उनके अनुसार, विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने का काम कर रहा है।

1977, 1980 और 1989 में भी चुनाव से बदली थी सत्ता
पवन खेड़ा ने भारतीय राजनीति के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि देश में वर्ष 1977, 1980 और 1989 में भी रिजीम चेंज हुआ था। इन सभी मौकों पर सत्ता परिवर्तन चुनाव के जरिए ही हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को सरकार बदलने का अधिकार है और विपक्ष का काम सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अन्ना आंदोलन का जिक्र कर भाजपा पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने वर्ष 2012 के अन्ना आंदोलन को याद करते हुए भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा ने आंदोलन को काफी समर्थन दिया था और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली भी आंदोलन के मंच पर पहुंचे थे। खेड़ा के मुताबिक, उस दौरान भाजपा ने भी खुलकर तत्कालीन सरकार को हटाने की बात कही थी। उन्होंने सवाल किया कि जब भाजपा विपक्ष में रहते हुए सरकार बदलने की मांग कर सकती थी, तो आज विपक्ष के ऐसा कहने पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?

मोदी सरकार को दस दिन भी सत्ता में नहीं देखना चाहता विपक्ष
पवन खेड़ा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि विपक्ष यह कहे कि उनकी सरकार अगले दस साल तक बनी रहे? उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष ऐसा नहीं कहेगा। खेड़ा ने कहा कि उनकी राजनीतिक इच्छा तो यह है कि मौजूदा सरकार दस दिन भी और सत्ता में न रहे। उन्होंने इसे विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकार और राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया।
विपक्ष का कुनबा बढ़ने का दावा, सरकार के खिलाफ कई मुद्दे
पवन खेड़ा ने दावा किया कि केंद्र सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास केवल एक मुद्दा नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से अनेक मुद्दे जनता खुद उठा रही है और विपक्ष उन सवालों को राजनीतिक मंचों पर मजबूती से रख रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में विपक्षी एकजुटता और मजबूत हो सकती है। खेड़ा के मुताबिक, विपक्ष का कुनबा लगातार बढ़ रहा है और जल्द ही राजनीतिक तस्वीर में कुछ नए चेहरे भी दिखाई दे सकते हैं।

