PM Modi China Visit :प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार (30 अगस्त 2025) को चीन पहुंच चुके हैं, जहां वह शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएं भी होंगी। इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में चर्चा करेंगे।

एससीओ शिखर सम्मेलन में मोदी का महत्व
शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन, जो चीन में हो रहा है, एशिया और यूरोप के देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने का एक प्रमुख मंच है। एससीओ में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान सहित आठ सदस्य देश शामिल हैं। इस सम्मेलन में क्षेत्रीय और वैश्विक समस्याओं पर चर्चा होगी, जिसमें विशेष ध्यान अफगानिस्तान संकट, आतंकवाद, और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर होगा।

प्रधानमंत्री मोदी एससीओ के मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत करने के लिए अपनी बात रखेंगे। भारत ने हमेशा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी उपायों और आर्थिक विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात की है। मोदी की यह यात्रा भारतीय कूटनीति की मजबूती का प्रतीक है, क्योंकि भारत एससीओ जैसे महत्वपूर्ण मंच पर सक्रिय भूमिका निभाता आया है।
द्विपक्षीय वार्ता का अहम बिंदु
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू उनके चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन मोदी और जिनपिंग के बीच संवाद से उम्मीद की जा रही है कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
चीन और भारत के बीच सुरक्षा, व्यापार, और सीमा विवाद जैसे मुद्दे हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। इस वार्ता में उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों नेता पारस्परिक विश्वास बढ़ाने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, व्यापार और आर्थिक संबंधों को और गहरे बनाने पर भी बातचीत हो सकती है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ वार्ता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक रक्षा और ऊर्जा सहयोग है, जिसे और बढ़ाने के लिए इस बैठक में अहम कदम उठाए जा सकते हैं। विशेष रूप से, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय होगी।
चीन में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा के दौरान उनका भव्य स्वागत किया गया। तियानजिन एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी को रेड कारपेट पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जो दोनों देशों के रिश्तों में संभावित सुधार की ओर इशारा करता है। चीनी अधिकारियों ने इस स्वागत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के भारत और चीन के बीच सामूहिक विकास के दृष्टिकोण को सराहा।
अगले दिन की यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी 1 सितंबर तक चीन में रहेंगे और इस दौरान वह चीन-भारत संबंधों के साथ-साथ एससीओ के दूसरे देशों के साथ भी द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे। पीएम मोदी का यह दौरा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत के वैश्विक कूटनीतिक दृष्टिकोण को और सशक्त बनाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा भारत-चीन और भारत-रूस के रिश्तों को नए आयाम देने का मौका प्रदान करेगी। एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी न केवल भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे, बल्कि चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी नये स्तर तक ले जाने के प्रयास करेंगे।










