Kinnar Akhada
Kinnar Akhada: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में उस समय भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला, जब किन्नर अखाड़े की प्रमुख और प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु कल्याणी नंद गिरी (छोटी गुरु) का आगमन हुआ। उनके प्रतापगढ़ पहुंचने की सूचना मिलते ही स्थानीय निवासियों, श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह दौड़ गया। प्रयागराज से प्रतापगढ़ की सीमा में प्रवेश करते ही समर्थकों ने जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। रास्ते में जगह-जगह फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ उनका भव्य अभिनंदन किया गया, जिससे पूरा वातावरण धार्मिक रंग में रंग गया।
अपने प्रवास के दौरान कल्याणी नंद गिरी सीधे प्रसिद्ध बाबागंज हनुमान मंदिर पहुँचीं। यहाँ उन्होंने पवनपुत्र हनुमान के चरणों में माथा टेका और विधि-विधान से दर्शन-पूजन संपन्न किया। मंदिर के पुजारियों के सानिध्य में उन्होंने विशेष आरती में भाग लिया और लोक कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में उनके आगमन को लेकर विशेष सजावट की गई थी। आरती के पश्चात उन्होंने मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। इस दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘हनुमान जी की जय’ के उद्घोष से मंदिर गुंजायमान रहा।
इस खास अवसर पर बाबागंज मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। कल्याणी नंद गिरी के सानिध्य में आयोजित इस भंडारे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सेवा भाव को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने स्वयं भी वितरण कार्य का अवलोकन किया। संतों और अनुयायियों के इस समूह ने मिलकर मंदिर में पूजा-अर्चना की और समाज में सुख-शांति की प्रार्थना की। इस धार्मिक आयोजन ने स्थानीय लोगों के बीच समरसता और श्रद्धा का गहरा संदेश दिया।
कार्यक्रम में स्थानीय किन्नर समाज ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रमुख सदस्य मिस्बा किन्नर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय के लोग अपनी गुरु के स्वागत में पहुंचे थे। मिस्बा किन्नर और उनके साथियों ने मंदिर में कल्याणी नंद गिरी के साथ बैठकर पूजा-अर्चना की और उपस्थित जनसमूह को अपना आशीर्वाद दिया। यह दृश्य समाज में किन्नर अखाड़े की बढ़ती स्वीकार्यता और उनके प्रति लोगों के सम्मान को प्रदर्शित कर रहा था। साधु-संतों और अनुयायियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को एक बड़े धार्मिक उत्सव का रूप दे दिया।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कल्याणी नंद गिरी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “किन्नर अखाड़ा केवल एक आध्यात्मिक परंपरा का नाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सेवा और मानव कल्याण का एक सशक्त माध्यम है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किन्नर समाज आज धर्म और संस्कारों के मार्ग पर चलते हुए समाज के बीच सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से एक-दूसरे का सम्मान करने और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सहायता करने की अपील की। उनका संदेश स्पष्ट था— आपसी प्रेम और सौहार्द ही मानवता का असली धर्म है।
इस भव्य स्वागत समारोह में न केवल श्रद्धालु, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सभी ने कल्याणी नंद गिरी के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। उपस्थित लोगों ने माना कि किन्नर अखाड़े के प्रयासों से समाज में हाशिए पर रहने वाले लोगों को एक नई पहचान और सम्मान मिल रहा है। कार्यक्रम के अंत में कल्याणी नंद गिरी ने सभी को रक्षा सूत्र बांधकर और आशीर्वाद देकर विदा किया। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम ने प्रतापगढ़ की आध्यात्मिक चेतना को एक नई ऊर्जा प्रदान की।
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