Pune Crime News : पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ के तथावड़े इलाके में एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जीजी इंटरनेशनल स्कूल के निकट स्थित एक आवासीय परिसर में एक महिला और उसके दो बच्चों के शव बरामद किए गए हैं। मृतकों की पहचान कल्पना बिपिन सूर्यवंशी (35 वर्ष), उनकी बेटी शुभश्री (17 वर्ष) और बेटे दादू (10 वर्ष) के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि महिला ने आर्थिक तंगी के दबाव में आकर पहले अपने बच्चों को जहर देकर मारा और फिर स्वयं आत्महत्या कर ली। फिलहाल, वाकड पुलिस ने तीनों शवों को वाईसीएम अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और विसरा को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। पुलिस मामले को एक्सीडेंटल डेथ मानकर विस्तृत जांच कर रही है।

मुंबई लोकल ट्रेन में मामूली बहस बनी जानलेवा
दूसरी ओर, मुंबई लोकल ट्रेन में हुई एक सनसनीखेज हत्या की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वारदात 23 जून की रात करीब 10 बजे वेस्टर्न रेलवे लाइन पर उस समय हुई, जब एक 21 वर्षीय युवक मयंक लोहार की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। घटना का कारण बेहद मामूली था—ट्रेन के कोच का दरवाजा बंद करने को लेकर मयंक और आरोपी रोशन सुवर्ण (30 वर्ष) के बीच तीखी बहस हुई थी। ट्रेन में पानी अंदर आने के कारण मयंक ने दरवाजा बंद करने का आग्रह किया था, जो आरोपी को इतना नागवार गुजरा कि उसने अपने बैग से चाकू निकाल कर मयंक के पेट में घोंप दिया।

आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस, परिवार में कोहराम
इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी रोशन सुवर्ण मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बोरीवली स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने से कुछ पल पहले ही आरोपी चलती ट्रेन से प्लेटफॉर्म नंबर 6 के पास कूद गया और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। इस घटना के बाद मयंक के परिवार और दोस्तों में गहरा शोक और आक्रोश है। शोकाकुल परिजनों ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और उसे कठोरतम दंड दिलाने की मांग की है। रेलवे पुलिस आरोपी की पहचान सुनिश्चित कर उसकी धरपकड़ के लिए विभिन्न टीमें तैनात कर चुकी है।
कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल
महाराष्ट्र में एक ही समय में हुई इन दो घटनाओं ने आम जनमानस को असुरक्षित महसूस करने पर मजबूर कर दिया है। जहाँ एक तरफ तथावड़े की घटना सामाजिक और आर्थिक तनाव के गहरे संकट को दर्शाती है, वहीं मुंबई की घटना छोटी-छोटी बातों पर बढ़ते हिंसक आवेग को उजागर करती है। समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हताशा के बीच पुलिस प्रशासन के लिए ऐसी घटनाओं को रोकना एक बड़ी चुनौती बन गया है। प्रशासन की ओर से लोगों को संयम बरतने की सलाह दी गई है, लेकिन इन घटनाओं ने समाज में डर का माहौल जरूर पैदा कर दिया है।
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