Rahul Gandhi in Lok Sabha
Rahul Gandhi in Lok Sabha: संसद के विशेष सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम और अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक भाषण दिया। उन्होंने राजनीति के दांव-पेंचों से हटकर अपने बचपन, अपनी दादी इंदिरा गांधी की सीख और अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीतिक यात्रा का जिक्र किया। राहुल का यह संबोधन न केवल महिलाओं के साहस को समर्पित था, बल्कि इसमें सत्ता पक्ष के प्रति एक सौम्य कटाक्ष और पारिवारिक मूल्यों की झलक भी देखने को मिली।
राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी की राजनीतिक सक्रियता और उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए सदन का ध्यान खींचा। उन्होंने बड़े ही सहज अंदाज में स्वीकार किया, “मैंने पिछले 20 वर्षों की राजनीति में जो हासिल नहीं किया, वह मेरी बहन प्रियंका ने मात्र 5 वर्षों में कर दिखाया।” राहुल के इस बयान पर सदन में काफी हलचल देखी गई। उन्होंने विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह प्रियंका के बारे में बात कर रहे थे, तब उन्होंने अमित जी के चेहरे पर भी एक मुस्कान देखी। राहुल ने इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में लिया और महिला नेतृत्व की शक्ति को रेखांकित किया।
अपने भाषण को एक कहानी का रूप देते हुए राहुल गांधी ने अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह छोटे थे, तो उन्हें अंधेरे से बहुत डर लगता था। उनके घर में एक बड़ा कुत्ता था जो अक्सर उन पर और प्रियंका पर हमला करने की कोशिश करता था, जिसके कारण वे रात में गार्डन की तरफ जाने से घबराते थे। राहुल ने बताया कि यह डर उनके मन में गहराई तक बैठा हुआ था, लेकिन एक दिन उनकी दादी इंदिरा गांधी ने इस डर को जड़ से खत्म करने का फैसला किया।
राहुल ने वह दृश्य याद किया जब उनके माता-पिता एक बार डिनर पर बाहर गए हुए थे। उस रात इंदिरा गांधी ने पीले रंग की साड़ी पहनी थी। राहुल ने बताया कि उनकी दादी उन्हें उसी डरावने अंधेरे गार्डन में ले गईं और वहां उन्हें अकेला छोड़ दिया। राहुल लगभग तीन घंटे तक वहां रहे, जहां उनके पैर कांप रहे थे और वह बुरी तरह डरे हुए थे। उस समय इंदिरा गांधी ने उनके पास आकर पूछा कि वह वास्तव में किस चीज से डर रहे हैं। राहुल का जवाब था—सांप, कुत्ते और वह अंधेरा।
इंदिरा गांधी ने राहुल को जो सीख दी, उसे उन्होंने आज के राजनीतिक संदर्भ में भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने अपनी दादी के शब्दों को दोहराते हुए कहा, “तुम इन चीजों से नहीं, बल्कि अपने दिमाग की उपज से डर रहे हो। तुम उस कल्पना से डर रहे हो जो तुम्हारे मन ने बनाई है।” इंदिरा गांधी ने उन्हें सिखाया कि असल सच्चाई अक्सर उसी अंधकार में छिपी होती है जिसे हम देखने से कतराते हैं। राहुल ने सदन को बताया कि एक महिला और उनकी दादी ने उन्हें सिखाया कि डर पर विजय पाने का एकमात्र रास्ता उसका सामना करना है।
राहुल गांधी ने इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि महिलाएं न केवल ममता का प्रतीक हैं, बल्कि वे साहस और मानसिक दृढ़ता की भी प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे बिल केवल कागजों पर नहीं, बल्कि महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण और उनके निडर स्वभाव के सम्मान के रूप में देखे जाने चाहिए। राहुल ने यह स्पष्ट किया कि जिस प्रकार एक महिला ने उनके जीवन से डर को निकाला, उसी प्रकार देश की महिलाएं भारत के भविष्य से हर प्रकार के डर और अंधकार को मिटाने की क्षमता रखती हैं।
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