Rahul Gandhi voter list issue: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक की अलंद (Aland) विधानसभा सीट पर 6018 वोट डिलीट किए गए थे, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। इस आरोप पर अब कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।

क्या है मामला?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान कर्नाटक की अलंद सीट पर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित प्रयास था ताकि मतदाताओं के अधिकारों को कुचला जा सके।

इससे पहले भी राहुल गांधी 7 अगस्त को इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से कार्य नहीं कर रहा और कई जगहों पर सत्ताधारी दल के इशारे पर काम हो रहा है।
चुनाव आयोग और कर्नाटक CEO की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग (ECI) ने तुरंत प्रेस बयान जारी कर उनके दावों को “बिलकुल निराधार” बताया। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया होती है, और किसी भी तरह का अनधिकृत परिवर्तन नहीं किया गया है।
गुरुवार देर शाम कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत बयान साझा किया। उन्होंने बताया कि:साल 2023 में अलंद विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं को हटाने की कुछ असफल कोशिशें की गई थीं।इस संबंध में 21 फरवरी 2023 को अलंद पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR No. 26/2023) दर्ज की गई थी।एफआईआर बीएलओ (Booth Level Officer) की रिपोर्ट और ईआरओ (Electoral Registration Officer) की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई।अब तक जांच की प्रगति की कई बैठकें चुनाव आयोग के अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ हो चुकी हैं।मुख्य निर्वाचन अधिकारी लगातार जांच एजेंसी को हर जरूरी दस्तावेज, सूचना और सहयोग दे रहे हैं।
राजनीतिक और चुनावी पृष्ठभूमि
कर्नाटक की अलंद विधानसभा सीट पर 2018 में भाजपा के सुभाष गुट्टेदार ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2023 में यह सीट कांग्रेस के बीआर पाटिल के खाते में गई। इसलिए यह सीट राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है।
राहुल गांधी के आरोपों ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है, खासकर उस समय जब देश कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहा है।
राहुल गांधी द्वारा लगाए गए वोट डिलीट होने के आरोपों को लेकर मामला अब राजनीतिक से अधिक प्रशासनिक दिशा में बढ़ चुका है। कर्नाटक चुनाव आयोग की सक्रियता और जांच में पारदर्शिता की मांग इस विषय को और भी गंभीर बना देती है। अब देखना होगा कि जांच पूरी होने पर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या इससे चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा और मजबूत हो पाता है।
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