Trump Modi Friendship: भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई एक बार फिर उजागर हुई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की। ब्रिटेन के राजकीय दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “मैं भारत के बहुत करीब हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बहुत करीब हूं।”

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पीएम मोदी से फोन पर बातचीत की और उनके 75वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच हमेशा सकारात्मक संवाद रहा है और वे मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति से बेहद प्रभावित हैं।

ट्रंप ने की मोदी के “जबरदस्त काम” की सराहना
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, “अभी-अभी अपने मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बहुत अच्छी बातचीत हुई। मैंने उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं! वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” ट्रंप ने आगे कहा कि मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए जो समर्थन दिया है, उसके लिए वह आभार व्यक्त करते हैं।
तेल, रूस और वैश्विक नीतियों पर भी रखी राय
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने चीन और रूस के साथ अमेरिका के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब दुनिया में सबसे अधिक तेल उत्पादन करने वाला देश है और उन्होंने तेल कीमतों को नीचे लाने के लिए कई प्रयास किए हैं।
उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों पर निशाना साधा जो रूस से तेल खरीद रहे हैं, और कहा कि यह स्थिति तब सही नहीं जब अमेरिका उनके हितों की रक्षा कर रहा हो। हालांकि, भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।
मोदी का भी आया जवाब
प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्रंप के फोन कॉल के लिए धन्यवाद दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उन्होंने लिखा, “पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करके प्रसन्नता हुई। उनके जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।”मोदी ने यह भी दोहराया कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए शांति और संवाद का समर्थन करता है।
डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंध भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को दर्शाते हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता है, दोनों नेताओं की यह संवादशीलता और आपसी सम्मान विश्व मंच पर भारत की भूमिका को और सशक्त बनाती है।










